सोनम वांगचुक के खिलाफ रासुका के मामले में कोई दम नहीं, इसलिए सरकार ले रही तारीख पर तारीख: गीतांजलि

सोनम वांगचुक के खिलाफ रासुका के मामले में कोई दम नहीं, इसलिए सरकार ले रही तारीख पर तारीख: गीतांजलि

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  • Publish Date - January 18, 2026 / 04:32 PM IST,
    Updated On - January 18, 2026 / 04:32 PM IST

(अंजलि ओझा)

नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा)जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने कहा है कि उनके पति की गिरफ्तारी देश में लोकतंत्र की स्थिति को दर्शाती है, जहां सत्ता का इस्तेमाल लोगों को ‘‘अवैध रूप से हिरासत में लेने’’ के लिए किया जाता है।

उन्होंने दावा किया कि वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के मामले में कोई दम नहीं है इसलिए सरकार अदालत से बार-बार नई तारीख मांग रही है।

अंगमो ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा की गई ‘‘प्रक्रियात्मक चूक’’ के मद्देनजर वांगचुक को पहले ही जेल से बाहर आ जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह ‘‘बिल्कुल स्पष्ट मामला’’ है।

अंगमो ने स्वीकार किया कि उन्हें इस बात से थोड़ी निराशा हुई है कि वांगचुक की गिरफ्तारी का कड़ा विरोध नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम चुप नहीं रह सकते’’ और वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ सामूहिक और मुखर विरोध की अपील की।

अंगमो ने कहा, ‘‘यह सिर्फ सोनम वांगचुक के बारे में नहीं है, बल्कि इस देश में लोकतंत्र की स्थिति के बारे में है, इस देश के लिए काम करने वाले लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने के लिए सत्ता का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर यह सोनम के साथ हो सकता है, तो किसी और के साथ भी हो सकता है।’’

मैगसायसाय पुरस्कार से सम्मानित जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद वांगचुक को 26 सितंबर को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका)के तहत हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ यह कार्रवाई लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी। उक्त विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र शासित प्रदेश में चार लोग मारे गए और 90 घायल हो गए थे। वांगचुक को जोधपुर की जेल में ले जाया गया था।

पुलिस के मुताबिक, जलवायु कार्यकर्ता ने ‘‘भड़काऊ बयान’’ दिया, जिसकी वजह से हिंसा भड़की।

वांगचुक के साथ मिलकर हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख की स्थापना करने वाली अंगमो ने पति की हिरासत को चुनौती देते हुए और उनकी तत्काल रिहाई का अनुरोध करते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है।

अंगमो ने कहा, ‘‘यह काफी मुश्किल काम रहा है, हिरासत आदेश प्राप्त करने और सोनम से मिलने के लिए उच्चतम न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने की जरूरत थी और उसके दायर होने के बाद भी, उनके हस्तलिखित नोट्स प्राप्त करना एक चुनौती थी।’’

वांगचुक द्वारा अपनी हिरासत के संबंध में तैयार किए गए हस्तलिखित नोट्स शीर्ष न्यायालय में प्रस्तुत कानूनी दस्तावेजों का हिस्सा हैं।

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वांगचुक को रासुका के तहत हिरासत में लिए जाने के खिलाफ अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई 29 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले, केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का पक्ष रखने के लिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा अंगमो की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था, जिसके बाद 24 नवंबर 2025 को भी मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई थी।

अगमो ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि रासुका के अनुसार, अधिकारियों को हिरासत के आधार स्थापित करने वाले दस्तावेजों सहित सभी दस्तावेज ‘‘पांच या अधिकतम 10 दिनों’’ के भीतर बंदी को उपलब्ध कराने चाहिए।

उन्होंने ने दावा किया, ‘‘लेकिन ये चारों वीडियो उन्हें 28वें दिन, यानी 23 अक्टूबर को दिए गए। यह एक बहुत बड़ी प्रक्रियात्मक चूक है, जिसके आधार पर हिरासत आदेश को शुरू से ही अमान्य घोषित किया जाना चाहिए।’’

अंगमो ने कहा, ‘‘एक तरह से देखा जाए तो, सिर्फ इसी आधार पर यह स्पष्ट मामला है, क्योंकि यह रासुका की धारा 8 का उल्लंघन करता है। इसका परिणाम यह है कि चूंकि उन्हें ये वीडियो नहीं मिले, इसलिए उन्हें सलाहकार बोर्ड के सामने प्रभावी प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला – जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 11 के तहत आता है।’’

अंगमो ने कहा कि वांगचुक को हिरासत में लेने के लिए दिये गए आधार ‘‘पुराने’’ हैं और उनमें से कुछ ‘‘डेढ़ साल या एक साल पुराने वीडियो पर आधारित हैं’’।

जलवायु कार्यकर्ता की पत्नी ने कहा कि जिन पांच प्राथमिकियों को आधार बनाया गया है उनमें से तीन में वांगचुक का नाम तक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन दो प्राथमिकी में वांगचुक को नामजद किया गया है, उनमें से एक अगस्त 2025 की है, जिस पर न तो कोई नोटिस जारी किया गया और न ही कोई जांच की गई।

अंगमो ने आगे कहा कि जिला मजिस्ट्रेट का हिरासत आदेश पुलिस अधीक्षक द्वारा दिए गए प्रस्ताव की ‘‘कॉपी-पेस्ट’’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘जिला मजिस्ट्रेट को विवेक का प्रयोग करना चाहिए, न कि जो कुछ भी उन्हें दिया जाता है, उसे हूबहू कॉपी-पेस्ट कर देना चाहिए। इस संबंध में कई फैसले हैं कि यदि विवेक का प्रयोग नहीं किया गया है, तो हिरासत भी निष्फल हो जाती है।’’

जब उनसे हाल ही में संसद सत्र में वांगचुक की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाए जाने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह उन सभी लोगों की आभारी हैं, जिन्होंने यह मुद्दा उठाया, जिनमें लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा भी शामिल हैं, जिनका ‘‘माइक म्यूट कर दिया गया था’’, जब उन्होंने यह मुद्दा उठाया था।

अंगमो ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे इस बात की थोड़ी निराशा भी है कि इस मुद्दे को उस हद तक नहीं उठाया गया, जितना उठाया जाना चाहिए था।’’

अंगमो ने कहा, ‘‘केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल, हमेशा तारीखें आगे बढ़ाते रहते हैं, देरी करने की रणनीति अपनाते हैं, क्योंकि मुझे लगता है कि उन्हें एहसास हो गया है कि इस मामले में कोई दम नहीं है।’’

उन्होंने हालांकि कहा, ‘‘मुझे बताया गया है कि अन्य मामलों की तुलना में, हमें अभी भी काफी जल्दी तारीखें मिल रही हैं।’’

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप