नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ (पीआरएचआई) ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की आत्मकथा को प्रकाशित नहीं करने के उसके फैसले के पीछे कोई बाहरी दबाव नहीं था बल्कि चर्चा के दौरान ‘‘एक विशेष मुद्दे’’ को लेकर गतिरोध सामने आया था।
प्रकाशक ने समझौते और लेखक की गोपनीयता का हवाला देते हुए उस मुद्दे का खुलासा नहीं किया।
पीआरएचआई का यह नया स्पष्टीकरण कांग्रेस नेता की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के भारत में प्रकाशन को लेकर उठे विवाद के बीच आया है। अमेरिका स्थित प्रकाशक ‘अल्फ्रेड ए नॉफ’ ने घोषणा की है कि यह पुस्तक 10 नवंबर को दुनियाभर में प्रकाशित होगी।
अल्फ्रेड ए. नॉफ, पेंगुइन रैंडम हाउस का एक प्रकाशन संस्थान है।
कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार के दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, आरएसएस और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा ‘‘भारतीय क्षेत्र पर किए गए कब्जे’’ से संबंधित अंश हटाने का दबाव डाला गया था।
अपने ताजा बयान में पीआरएचआई ने स्पष्ट रूप से उन अटकलों को खारिज किया कि संस्मरण को प्रकाशित नहीं करने का फैसला बाहरी हस्तक्षेप के कारण लिया गया।
पीआरएचआई की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से विशेष बातचीत में कहा, ‘‘हमारा मानना है कि ‘बिलॉन्गिंग’ के संबंध में कुछ गलत प्रस्तुतियों को स्पष्ट करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इस पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए वास्तव में उत्सुक था तथा इसके अधिकार हासिल करने के लिए काफी प्रयास किए गए थे।’’
प्रकाशक ने कहा, ‘‘चूंकि पुस्तक की विषय-वस्तु गोपनीय है और उस पर प्रकाशन से पहले का प्रतिबंध (एम्बार्गो) है… किसी भी तरह का बाहरी दबाव नहीं था।’’
पीआरएचआई ने कहा कि पांडुलिपि को लेकर ‘‘सामान्य संपादकीय प्रक्रिया’’ अपनाई गई, जिसके दौरान कई बिंदु उठाए गए और लेखक के प्रतिनिधियों के साथ उन पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रकाशन इकाई ने कहा, ‘‘कुछ मामलों में उन्होंने बदलावों पर सहमति जताई और कुछ अन्य मामलों में हमने लेखक के रुख को स्वीकार किया। दुर्भाग्य से और अंततः, एक खास मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।’’
पीआरएचआई के अनुसार, इसके बाद लेखिका की टीम ने प्रकाशक को सूचित किया कि वह पुस्तक के प्रकाशन की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाना चाहतीं। प्रकाशक ने कहा कि उसने उनके फैसले का सम्मान किया।
प्रकाशक ने कहा, ‘‘चूंकि हम एक समझौते से बंधे हैं और लेखक की गोपनीयता हमारे लिए सर्वोपरि है, इसलिए हम उस गतिरोध के कारणों का विवरण साझा नहीं करेंगे।’’
पेंगुइन इंडिया ने कहा कि प्रकाशक के तौर पर किसी पांडुलिपि का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना, सवाल उठाना, सुझाव देना और स्वतंत्र संपादकीय निर्णय लेना उसकी ‘‘जिम्मेदारी और कर्तव्य’’ है।
उसने कहा, ‘‘हमने ‘बिलॉन्गिंग’ के साथ भी यही किया।’’
इससे पहले प्रकाशक ने अपने बयान में कहा था कि वह संस्मरण को प्रकाशित करने के लिए इच्छुक था और संपादकीय जांच, तथ्य-जांच तथा सुझाव उसकी सामान्य प्रकाशन प्रक्रिया का हिस्सा थे।
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