नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) वैसे तो 2026 के पहले ढाई महीने में आग से संबंधित फोन कॉल में 19 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन पिछले वर्ष के आंकड़े और पालम की हालिया घटना लगातार जारी सुरक्षा खामियों को उजागर करती हैं।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष एक जनवरी से 15 मार्च तक आग लगने की 2,716 सूचनाएं मिलीं, जो 2025 की समान अवधि की ऐसी 3,352 सूचनाओं से कम हैं। शहर में वर्तमान में औसतन प्रतिदिन आग लगने की लगभग 36 सूचनाएं मिल रही हैं।
ऐसी घटनाओं में गिरावट के बावजूद, हताहतों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। इस साल आग की घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मौत और 111 लोगों के घायल होने की सूचना मिली है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ऐसी घटनाओं में 18 लोगों की मौत और 109 लोगों के घायल होने की सूचना मिली थी।
वर्ष 2025 के आंकड़ों से पता चला कि अग्निशमन विभाग ने आग लगने की कुल 18,670 सूचनाओं पर कार्रवाई की, जबकि बचाव अभियान समेत आपातकालीन सूचनाओं (फोन कॉल) की कुल संख्या 35,865 रही। यह राजधानी में आग से संबंधित आपात स्थितियों की व्यापकता को दर्शाती है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष आग की घटनाओं में कम से कम 76 लोगों की जान गई और 565 लोग घायल हुए।
इसके अलावा, दमकलकर्मियों ने 2,278 बचाव अभियान चलाए, जिनमें 3,892 पशुओं और 3,251 पक्षियों को भी बचाया गया।
एक वरिष्ठ दमकल अधिकारी ने कहा कि आग लगने की 80 प्रतिशत से अधिक घटनाएं बिजली की खराबी से जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पुरानी वायरिंग प्रणालियों पर बढ़ता भार और खराब रखरखाव अक्सर शॉर्ट सर्किट का कारण बनते हैं। यह शहर में आग लगने के सबसे बड़े कारणों में से एक है।’’
उन्होंने कहा कि फर्नीचर, कपड़े और भंडारित सामान जैसी ज्वलनशील सामग्री की मौजूदगी स्थिति को और भी बदतर बना देती है, जिससे आग तेजी से फैलती है।
अठारह मार्च को पालम में हुई भीषण आग के बाद यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। पालम में एक आवासीय इमारत में आग लगने से एक ही परिवार के नौ सदस्यों की मौत हो गई थी। इस इमारत की निचली मंजिलों का व्यावसायिक उपयोग होता था।
भाषा
राजकुमार सुरेश
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