कोलकाता, 30 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक विरासत को लेकर जारी संघर्ष अब एक और प्रतीकात्मक संगठनात्मक कार्यक्रम तक पहुंचने वाला है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला विरोधी गुट 28 अगस्त को टीएमसी की छात्र शाखा तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) का स्थापना दिवस मनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने की पुलिस से अनुमति मांग रहा है, जिससे ममता बनर्जी खेमे के साथ एक और टकराव की स्थिति बन रही है।
यह घटनाक्रम 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ मनाने के लिए जगह को लेकर दोनों विरोधी गुटों के बीच हुई ‘हाई-प्रोफाइल’ लड़ाई के बमुश्किल एक हफ्ते बाद सामने आया है। इस मुकाबले को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद संगठनात्मक ताकत की पहली सार्वजनिक परीक्षा के तौर पर देखा गया था।
नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के बागी खेमे के सूत्रों के अनुसार, 28 अगस्त को तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) का स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए कोलकाता पुलिस को पहले ही एक आवेदन दिया जा चुका है।
एक ही जगह पर कार्यक्रम करने पर जोर देने के बजाय गुट ने कई जगहों का प्रस्ताव दिया है और अंतिम फैसला पुलिस पर छोड़ दिया है। गुट के नेताओं ने प्रस्तावित जगहों का खुलासा करने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि जहां भी अनुमति मिलेगी कार्यक्रम ‘पूरी तरह से कानून के अनुसार’ आयोजित किया जाएगा।
गुट के एक नेता ने कहा, ‘‘जगह को लेकर कोई सख्ती नहीं है। पुलिस हमें जहां भी इजाजत देगी, हम वहीं कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यह कार्यक्रम निश्चित रूप से होगा।’’
इस बीच, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट भी टीएमसीपी का स्थापना दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। यह पार्टी के युवा केंद्रित सबसे प्रमुख सालाना कार्यक्रमों में से एक है, जो पारंपरिक रूप से मध्य कोलकाता में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास मेयो रोड पर आयोजित किया जाता है।
विरोधी गुट के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के वकील बैश्वानर चट्टोपाध्याय ने पत्रकारों से कहा, ‘‘अगर ममता बनर्जी वहां अकेली भी खड़ी हों, तो भी लोग उनके आस-पास एकत्र हो जाएंगे। वे प्रदान की गई विभिन्न अनुमति को जितना अधिक रद्द करेंगे, उतने ही अधिक लोग दीदी के साथ खड़े होने आएंगे।’’
21 जुलाई के शहीद दिवस कार्यक्रम की तरह ही, टीएमसीपी का वार्षिक स्थापना दिवस भी पार्टी के लिए छात्रों और युवाओं के बीच अपनी संगठनात्मक पहुंच दिखाने का एक अहम मंच रहा है।
अब जब दोनों गुट तृणमूल की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा कर रहे हैं, तो 28 अगस्त का कार्यक्रम जमीनी स्तर पर लोगों को एकजुट करने और जनता का समर्थन हासिल करने की एक और प्रतीकात्मक परीक्षा साबित हो सकता है।
भाषा संतोष प्रशांत
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