तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी गुटों को छह अक्टूबर के उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम, चुनाव चिह्न मिले

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तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी गुटों को छह अक्टूबर के उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम, चुनाव चिह्न मिले

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  • Publish Date - September 18, 2026 / 03:34 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 03:34 PM IST

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीट पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी की अगुवाई वाले तृणमूल कांग्रेस के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और अरूप रॉय की अगुवाई वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया।

आयोग के आदेश के अनुसार, ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ जबकि अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है।

निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार रात जारी अपने अंतरिम आदेश में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (एआईटीसी) को लेकर विवाद में शामिल दोनों पक्षों को निर्देश दिया था कि वे आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और उसके ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करें। आयोग ने उनसे शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न बताने को कहा था।

आयोग ने कहा था कि प्रस्तावित नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से मिलता-जुलता हो सकता है और चुनाव चिह्न निर्दलीय उम्मीदवारों एवं पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए अधिसूचित खाली या उपलब्ध चुनाव चिह्नों की सूची में से चुना जाना चाहिए।

पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम एवं मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर में उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।

निर्वाचन आयोग ने कहा था कि ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968’ के पैरा 15 के तहत कार्यवाही पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था लेकिन उसने आगामी उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की जरूरत को ध्यान में रखा।

आयोग ने कहा था कि यह अंतरिम व्यवस्था खास तौर पर आगामी उपचुनावों के लिए की गई है और यह तब तक लागू रहेगी जब तक कि ‘चुनाव चिह्न आदेश’ के पैरा 15 के तहत विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट पर जीत हासिल की थी और नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया था जबकि आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने नाओदा और रेजीनगर दोनों सीट पर जीत हासिल करने के बाद रेजीनगर सीट छोड़ दी थी। इसी कारण ये उपचुनाव कराने अनिवार्य हो गए हैं।

निर्वाचन आयोग का यह आदेश उस बगावत की पृष्ठभूमि में आया है जो मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस विधायक दल में शुरू हुई थी और बाद में संसद तक पहुंच गई थी।

जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता हासिल की, जो 28 साल के इतिहास में पहली बार पार्टी में विभाजन का संकेत था।

इसके पांच दिन बाद यह बगावत संसद तक पहुंच गई। वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 लोकसभा सदस्यों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) का दामन थामा और ‘‘अलग गुट के तौर पर’’ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन दिया। इससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई।

यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए झटका है। कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना होने के बाद से ही उनके द्वारा हाथ से बनाया गया चुनाव चिह्न पार्टी की पहचान का अहम हिस्सा रहा है।

यह चुनाव चिह्न पिछले 28 वर्ष से पार्टी की पहचान रहा है।

भाषा

सिम्मी पवनेश

पवनेश