नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) भारत और ब्रिटेन में सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों, नीति निर्माताओं, उद्यमियों और रचनात्मक पेशेवरों का दो दिवसीय सम्मेलन दिल्ली स्थित ब्रिटिश काउंसिल में आयोजित किया जाएगा।
इस दौरान सतत फैशन, फिल्म, संगीत, डिजाइन, दृश्य कला और मंचीय कला सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
भारत-ब्रिटेन सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम (2025-2030) के तहत 29 और 30 जनवरी को ‘रचनात्मक सम्मिलन: विकास पुनर्कल्पना’ विषय पर बैठक का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य रचनात्मक अर्थव्यवस्था के भविष्य को नया रूप देना है।
इस कार्यक्रम में यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक टिम कर्टिस, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल और ब्रिटिश काउंसिल की वैश्विक कला निदेशक रूथ मैकेंजी जैसे बड़े नीति निर्माता और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत के तेजी से उभरते रचनात्मक क्षेत्रों, सामने आ रहे अनुसंधान तथा भारत और ब्रिटेन के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव पर सार्थक संवाद करना है। साथ ही, इसके जरिए भविष्य के लिए समावेशी और टिकाऊ साझेदारी के नए रास्ते तलाशने पर भी जोर दिया जाएगा।
भारत में ब्रिटिश काउंसिल की स्थानीय निदेशक एलिसन बैरेट ने एक बयान में कहा, ‘रचनात्मक अर्थव्यवस्थाएं अलग-थलग रहकर विकसित नहीं होतीं बल्कि वे तब फूलती-फलती हैं जब सरकारी नीति, शोध और रचनात्मक प्रयास एक ही दिशा में आगे बढ़ें। ‘रचनात्मक सम्मिलन’ का मुख्य उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच रचनात्मक संबंधों को और गहरा करना है ताकि विचारों को स्थायी आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव में तब्दील किया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘बेंगलुरु में आयोजित पहले संस्करण की सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब दिल्ली का यह आयोजन एक महत्वपूर्ण अगले चरण को दर्शाता है।’
उनके अनुसा दिल्ली में आयोजित होने वाले इस संस्करण में सहयोग और नवाचार पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य रचनात्मक नेटवर्क को मजबूत करना, सीमा पार आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और ऐसे सतत आर्थिक मॉडल तलाशना है जिससे रचनात्मक उद्यमियों और युवा पेशेवरों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।
भाषा प्रचेता माधव
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