चेन्नई, छह अगस्त (भाषा) एमडीएमके के दो विधायकों ने अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और घोषणा की कि वे द्रमुक विधायक के रूप में बने रहेंगे।
कदयानलूर के विधायक टी एम राजेंद्रन और सिरकाझी के विधायक आर सेंथिल सेल्वन ने पांच अगस्त को संयुक्त रूप से संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने हाल में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी, इसलिए वे आधिकारिक तौर पर द्रमुक के सदस्य हैं और विधानसभा में पार्टी के बैनर तले काम करेंगे।
यह घोषणा हाल में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद की गई है, जिसमें वाइको के नेतृत्व वाली मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) ने द्रमुक से अपने संबंध तोड़ लिए थे।
विधायकों ने बताया कि एमडीएमके के महासचिव वाइको ने उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया क्योंकि यह उन मतदाताओं के साथ धोखा होता जिन्होंने उन्हें चुना था।
उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ चार महीने में इस्तीफा देकर जनता के पास वापस जाना विरोधाभासी है और हम उनका सामना नहीं कर सकते।’’ उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि वाइको ने खुद चुनाव प्रचार के दौरान जनता से वादा किया था कि विधायक पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे।
उन्होंने स्वीकार किया कि उनके इनकार करने की वजह से उनके और एमडीएमके प्रमुख के बीच ‘‘कड़वाहट’’ पैदा हो गई।
विधायकों ने एमडीएमके नेतृत्व की ओर से हाल में की गई आलोचना पर दुख जताया। उन्होंने एक संयुक्त बयान में कहा, ‘‘हमने बिना किसी उम्मीद के 40 साल तक नेता वाइको का साथ दिया, लेकिन आखिर में हमें सिर्फ अपमानजनक बातें सुननी पड़ीं और हमें बुरा-भला कहा गया।’’
विधायकों ने कहा कि उन्होंने शुरू में पार्टी नेतृत्व को यह जानकारी दी थी कि किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए वे छह महीने तक चुप रहेंगे। हालांकि, जब एमडीएमके के प्रधान सचिव ने आरोप लगाया कि वे ‘‘बिक’’ चुके हैं, तब उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सामने आना पड़ा।
दल बदलने की अटकलों को खारिज करते हुए विधायकों ने कहा कि वे दोबारा चुनाव का टिकट या मंत्री पद जैसे लुभावने प्रस्तावों के झांसे में नहीं आए और न ही सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने का कोई फैसला किया।
भाषा सुरभि वैभव
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