तृणमूल के दो विधायकों की विस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से मुलाकात, सियासी अटकलें तेज

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तृणमूल के दो विधायकों की विस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से मुलाकात, सियासी अटकलें तेज

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 11:17 AM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 11:17 AM IST

कोलकाता, 27 मई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस से मुलाकात की और इस दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां मौजूद थे।

चुनावी हार के बाद विपक्षी दल के भीतर बदलते समीकरणों के बीच यह घटनाक्रम नयी अटकलों को जन्म दे रहा है।

मंगलवार की यह मुलाकात आधिकारिक तौर पर ‘‘शिष्टाचार भेंट’’ बताई गई लेकिन यह दिल्ली स्थित पुराने बंग भवन में ऋतब्रत बनर्जी और शुभेंदु की हालिया मुलाकात के कुछ ही दिन बाद हुई है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की चुनाव बाद की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में नए समीकरण उभरने की अटकलें तेज हो गई हैं।

इस मुलाकात का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बनर्जी और साहा हाल में तृणमूल के भीतर मुखर आवाजों के रूप में उभरे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद दोनों ने संगठनात्मक और राजनीतिक फैसलों पर सवाल उठाए हैं।

इस महीने की शुरुआत में तृणमूल प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई एक बंद कमरे की बैठक में दोनों विधायकों ने कथित तौर पर चुनाव प्रबंधन और नेतृत्व के फैसलों पर सवाल खड़े किए थे।

इसलिए मंगलवार की यह मुलाकात कई लोगों को एक सामान्य शिष्टाचार भेंट से अधिक लगी। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष से बाहर निकलने के बाद दोनों नेताओं ने इसे कोई राजनीतिक महत्व देने से इनकार कर दिया।

बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की। हम रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाते रहेंगे।’’

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने अचानक मंगलवार को ही मिलने का फैसला क्यों किया तो कहा कि पहले कोई मौका नहीं मिल पाया था ।

उन्होंने कहा, ‘‘जिस दिन वह विधानसभा अध्यक्ष चुने गए, उस दिन बहुत व्यस्तता थी। आज सुना कि वह वहां हैं, तो हम मिलने चले गए।’’

साहा ने भी इसे महज संयोग बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम नवनिर्वाचित विधायकों के रूप में शिष्टाचार भेंट के लिए गए थे। संयोग से मुख्यमंत्री भी वहां थे। हमने अभिवादन किया। मैंने कभी उनके नेतृत्व में राजनीति की थी। इससे अधिक कुछ नहीं।’’

भाषा खारी रंजन

रंजन