नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 में हुए दंगों से संबंधित मामले के आरोपी उमर खालिद ने जमानत के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
खालिद की एक याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी, जिसमें उसने जमानत याचिका खारिज करने के चार जुलाई के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ करेगी।
सितंबर 2020 में गिरफ्तार किए गए खालिद पर गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसपर आरोप है कि वह फरवरी 2020 के दंगों के “मुख्य साजिशकर्ताओं” में से एक था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
साल 2019 के नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई थी।
शरजील इमाम, खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत विभिन्न लोगों पर इस बड़ी साजिश में कथित भूमिका के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ कर रहा है।
निचली अदालत ने चार जुलाई को खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि उसके पास उच्चतम न्यायालय के पांच जनवरी के आदेश का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, लिहाजा वह न तो इस याचिका पर सुनवाई कर सकता है और न ही राहत दे सकता है।
दो सितंबर, 2025 को उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने भी खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। पांच जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा था, लेकिन सह-आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी थी।
उस समय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा था कि यूएपीए के तहत खालिद और इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। पीठ ने यह भी कहा था कि “भागीदारी के स्तर” में अंतर होने के कारण सभी आरोपियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
भाषा जोहेब सुरेश
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