नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने देश के सभी पंजीकृत चिकित्सकों के लिए केंद्र द्वारा एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत चिकित्सकों को देश के किसी भी हिस्से में चिकित्सा सेवा देने के लिए दोबारा पंजीकरण कराने या लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी।
यह प्रस्ताव आयोग की ओर से 11 अगस्त को जारी ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एंड लाइसेंस टू प्रैक्टिस मेडिकल (संशोधन) विनियम, 2026’ के मसौदे का हिस्सा है।
प्रस्तावित ढांचे के तहत, जब कोई व्यक्ति या विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट राज्य के मेडिकल रजिस्टर में पजीकृत हो जाएगा तो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नैतिकता एवं चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड (ईएमआरबी) की ओर से केंद्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) जारी की जाएगी।
यह यूआईडी चिकित्सक को राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर (एनएमआर) में पंजीकरण प्रदान करेगी और उसे भारत में कहीं भी चिकित्सा अभ्यास करने की पात्रता देगी।
मसौदे में कहा गया है कि राज्य चिकित्सा रजिस्टर में पंजीकरण के बाद यूआईडी जारी की जाएगी, जिससे चिकित्सक का एनएमआर में पंजीकरण होगा और वह देश में कहीं भी चिकित्सा सेवा देने के लिए पात्र होगा।
अंतिम रूप दिए जाने और अधिसूचित होने के बाद यह व्यवस्था राज्यवार अलग-अलग पंजीकरण प्रणाली की जगह राष्ट्रीय स्तर की यूआईडी आधारित व्यवस्था स्थापित करेगी। हालांकि, पंजीकरण और लाइसेंस जारी करने तथा अपने अधिकार क्षेत्र के मामलों से निपटने में राज्य चिकित्सा परिषदों की भूमिका बनी रहेगी।
भाषा शोभना मनीषा
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