उप्र सरकार वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के पास व्यापक विकास योजना तैयार करे : न्यायालय

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उप्र सरकार वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के पास व्यापक विकास योजना तैयार करे : न्यायालय

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 10:46 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 10:46 PM IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को वृन्दावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के लिए एक व्यापक विकास योजना तैयार करने का निर्देश दिया। इस योजना में सड़कों का चौड़ीकरण और वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों तथा बीमार श्रद्धालुओं के लिए अन्य सुविधाओं का प्रावधान शामिल है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस दलील पर ध्यान दिया कि मंदिर में विराजमान देवता एक “जीवित बालक” हैं और सदियों पुरानी परंपराओं को आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के साथ संतुलित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया।

पीठ ने मंदिर के मामलों के प्रभावी प्रबंधन के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) में चार विशिष्ट गोस्वामी प्रतिनिधियों को शामिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि योजना में सड़कों के चौड़ीकरण, वाणिज्यिक गतिविधियों के नियमन, श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए सुविधाओं, होटलों, धर्मशालाओं, पेयजल, शौचालयों, आपातकालीन निकास, सार्वजनिक परिवहन और वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और बीमार श्रद्धालुओं के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच के मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, “इसलिए हमने राज्य सरकार के साथ-साथ समिति से भी एक रिपोर्ट तैयार करने और उसे हमारे विचारार्थ प्रस्तुत करने का अनुरोध किया है।”

‘सेवायतों’ (पुजारियों) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और वकील तन्वी दुबे ने कहा कि अदालत द्वारा नियुक्त एचपीसी “आवश्यक धार्मिक प्रथाओं” में हस्तक्षेप कर रही है।

उन्होंने विशेष रूप से एचपीसी के सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें ‘दर्शन’ के समय में बदलाव किया गया था।

दीवान ने कहा, “देवता एक सजीव बालक हैं। देवता को जगाने, अनुष्ठान करने और दोपहर के विश्राम के लिए विशिष्ट समय निर्धारित हैं। ये समय प्राचीन काल से चली आ रही परंपराओं में गहराई से निहित हैं और प्रशासनिक सुविधा के लिए इनमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।”

गोस्वामी समुदाय और मौजूदा प्रशासन के बीच “संवाद की कमी” को दूर करने के लिए, पीठ ने पुजारियों द्वारा मनोनीत चार सदस्यों को समिति में शामिल करने का आदेश दिया। ‘सेवायतों’ के दो प्राथमिक समूहों में से, पीठ ने रजत गोस्वामी और शैलेन्द्र गोस्वामी (शयन भोग समूह), और गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी (राजभोग समूह) को नामित किया।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “ये सभी मिलकर धार्मिक रीति-रिवाजों में सुधार और निरंतरता के लिए सुझाव देंगे। हमें इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि इन सुझावों, विशेष रूप से मंदिर के समय से संबंधित सुझावों पर उचित विचार किया जाएगा।”

वृंदावन की संकरी गलियों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “आपको लीक से हटकर सोचना होगा। तिरुपति के विपरीत, जहां स्थान की प्रचुरता है, बांके बिहारी संकरी गलियों में स्थित हैं।”

न्यायमूर्ति बागची ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक अनुष्ठान जारी रहने चाहिए, लेकिन श्रद्धालुओं का “शोषण” समाप्त होना चाहिए।

भाषा

प्रशांत दिलीप

दिलीप