नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2023 में संसद की सुरक्षा में सेंध मामले के एक आरोपी को मानवीय आधार पर 30 दिन की अंतरिम जमानत दे दी।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत की अवधि के दौरान आरोपी मामले से संबंधित किसी भी विषय पर न तो मीडिया से बात करेगा और न ही सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट साझा करेगा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित बंसल आरोपी सागर शर्मा की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
याचिका में आरोपी ने कहा कि उसके पिता का 14 जुलाई को कैंसर के कारण निधन हो गया और परिवार का एकमात्र पुरुष सदस्य होने के नाते उसे अंतिम संस्कार के बाद होने वाले धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने हैं।
न्यायाधीश ने 17 जुलाई के अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत याचिका मामले के गुण-दोष के आधार पर नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर दायर की गई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अभियोजन पक्ष ने इस याचिका का विरोध नहीं किया।
आदेश की यह प्रति मंगलवार को उपलब्ध हो पाई।
अदालत ने सागर शर्मा को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार पेश करने की शर्त पर 30 दिन की अंतरिम जमानत दे दी।
अदालत ने अंतरिम जमानत के साथ कई अन्य शर्तें भी लगाईं। इनमें सुनवाई की तारीख पर अदालत में डिजिटल माध्यम से पेश होना, जमानत अवधि बढ़ाने का अनुरोध नहीं करना, सप्ताह में तीन दिन संबंधित थाने में हाजिरी लगाना, इस तरह का कोई अपराध नहीं करना तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को धमकाने का प्रयास नहीं करना शामिल है।
संसद पर 2001 के आतंकी हमले की बरसी के दिन 13 दिसंबर, 2023 को सागर शर्मा और मनोरंजन डी दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए थे। उन्होंने कैन से पीला धुआं छोड़ा और नारेबाजी की। बाद में कुछ सांसदों और संसद के सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें काबू कर लिया था।
इसी दौरान मामले के दो अन्य आरोपी- नीलम रणोलिया और अमोल धनराज शिंदे ने भी संसद परिसर के बाहर कैन से रंगीन गैस छोड़ी और ‘‘तानाशाही नहीं चलेगी’’ के नारे लगाए थे।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश