उप्र पुलिस ने केजीएमयू चिकित्सक के मामले में काजी से पूछताछ की

उप्र पुलिस ने केजीएमयू चिकित्सक के मामले में काजी से पूछताछ की

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  • Publish Date - January 13, 2026 / 12:44 AM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 12:44 AM IST

पीलीभीत/ लखनऊ, 12 जनवरी (भाषा) दुष्कर्म और जबरन धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार लखनऊ के एक चिकित्सक के खिलाफ जांच कर रही पुलिस ने पीलीभीत में एक काजी से पूछताछ की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

इस बीच, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने एक आंतरिक जांच के बाद आरोपी चिकित्सक को निष्कासित करने का निर्णय लिया है।

लखनऊ पुलिस ने केजीएमयू के चिकित्सक रमीजुद्दीन नाइक से जुड़े मामले में काजी जाहिद हसन राणा का नाम सामने आने के बाद उनसे पीलीभीत में पूछताछ की।

पुलिस ने कहा कि वह इस बात की जांच कर रही है कि क्या निकाह कानूनी प्रक्रियाओं और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम का अनुपालन करते हुए हुआ या नहीं।

केजीएमयू की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने नाइक पर अपनी शादी छिपाने, शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण करने, जबरन गर्भपात कराने, धमकी देने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है। उसके खिलाफ बलात्कार, आपराधिक धमकी और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 सहित कई आरोपों के तहत 22 दिसंबर को मामला दर्ज किया गया था।

पीलीभीत के मोहल्ला फीलखाना निवासी शहर काजी जाहिद हसन राणा ने सोमवार को कहा कि उन्होंने निकाह से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी पुलिस को उपलब्ध करा दी है।

राणा ने दावा किया कि उन्होंने नाइक के साथ एक हिंदू युवती का निकाह उनके आवास पर कराया था और निकाह के समय युवती के माता-पिता एवं भाई स्वयं उपस्थित थे।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सभी की सहमति के बाद ही निकाह की रस्म पूरी की थी।

उन्होंने यह दावा भी किया कि लखनऊ में यौन शोषण और धर्मांतरण का मुकदमा दर्ज कराने वाली युवती वह नहीं है, जिसका निकाह उन्होंने कराया था।

इस बीच, केजीएमयू के प्रवक्ता के के सिंह ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि विश्वविद्यालय की कुलपति ने इस मामले की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विस्तृत जानकारी दी और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद लखनऊ में मुख्यमंत्री से मिलीं और आंतरिक जांच से सामने आये तथ्यों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इसमें विशाखा कमेटी की रिपोर्ट भी शामिल है जिसने आरोपी चिकित्सक के खिलाफ आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया था।

सूत्रों ने कहा कि कुलपति ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने आरोपी चिकित्सक को एमडी पाठ्यक्रम से निष्कासित करने का निर्णय किया है।

भाषा सं राजेंद्र सिम्मी

सिम्मी