छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर रास में हंगामा, चार बार के स्थगन के बाद सदन दिन भर के लिए स्थगित

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छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर रास में हंगामा, चार बार के स्थगन के बाद सदन दिन भर के लिए स्थगित

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  • Publish Date - July 27, 2026 / 07:45 PM IST,
    Updated On - July 27, 2026 / 07:45 PM IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक सोमवार को चार बार के स्थगन के बाद मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

हंगामे की वजह से उच्च सदन में शून्यकाल, प्रश्नकाल और अन्य विधायी कामकाज नहीं हो सका।

पूर्वाह्न 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने पर विपक्षी सदस्यों ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर पिछले सप्ताह दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। कांग्रेस अध्यक्ष एवं उच्च सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है।

इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वह नियम 267 के बारे में व्यवस्था दे चुके हैं।

राधाकृष्णन ने अपने पूर्व के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि नियम 267 के तहत केवल दिन की कार्यसूची में शामिल विषयों पर ही चर्चा कराई जा सकती है और वह भी ‘‘विरलतम परिस्थितियों’’ में तथा सदन की सहमति से।

खरगे ने कहा कि वह जो मुद्दा उठाने जा रहे हैं वह अत्यंत दुर्लभ ही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई ऐसा ही मामला है।

इस पर सभापति ने कहा, ‘‘असाधारण परिस्थिति होने के साथ इस पर पूरे सदन की सहमति भी होनी चाहिए… वह नहीं है।’’

खरगे ने कहा, ‘‘भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि लड़कों को पीटा गया… और उन्हें पैलेट (गन) से निशाना बनाया गया।’’

सभापति ने उनसे कहा कि वह शून्यकाल चलने दें। इस पर विरोध जताते हुए विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों ने फिर छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। सदस्यों ने इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग की।

द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा ने कहा, ‘‘इतने सारे छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। सरकार बहुत कुछ कर सकती है, लेकिन उनकी जिंदगी वापस नहीं लौटा सकती।’’

भाकपा सदस्य पी संदोष कुमार और माकपा के जॉन ब्रिटास ने भी छात्रों पर पुलिस के बल प्रयोग का मुद्दा उठाने का प्रयास किया। सत्ता पक्ष के सदस्य इस पर विरोध जता रहे थे वहीं विपक्षी सदस्य सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

हंगामे के कारण सभापति राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे बैठक शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा शुरू कराने का प्रयास किए।

यह विधेयक उच्च सदन में शुक्रवार को पेश किया गया था। इस विधेयक के प्रावधानों के तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान डालना या उसका अपमान आपराधिक कृत्य माना जायेगा और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। इस विधेयक के तहत 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन का प्रावधान किया गया है।

हरिवंश ने इस विधेयक पर चर्चा शुरू करानी चाही। लेकिन सदन में हंगामा जारी रहा और बैठक अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

अपराह्न तीन बजे बैठक शुरू होने पर भी सदन में शोरगुल नहीं थमा और विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। उपसभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत होने और विधेयक पर चर्चा करने की अपील की। लेकिन सदन में हंगामा कर रहे सदस्यों पर उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने बैठक शाम सवा पांच बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

शाम सवा पांच बजे बैठक शुरू होने पर भी विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने कार्य मंत्रणा समिति में राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा करने पर सहमति जताई थी। ‘‘लेकिन अब इस पर चर्चा नहीं कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा ‘‘नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सदन में मौजूद हैं। आप वरिष्ठ सदस्य हैं। आप अपनी पार्टी के सदस्यों को समझाइये जो हंगामा कर रहे हैं। बाहर जा कर आप कहते हैं कि हमें सदन में बोलने नहीं दिया जाता। लेकिन यहां आपसे हम अनुरोध कर रहे हैं फिर भी आप चर्चा में हिस्सा नहीं ले रहे।’’

खरगे ने कहा ‘‘हम सदन में चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन हम चाहते हैं कि गृह मंत्री सदन में आएं और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर बयान दें।’’

हंगामे की वजह से उपसभापति हरिवंश ने कुछ देर बाद ही बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ और नीट प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण पिछले सप्ताह एक भी दिन सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो पाए।

भाषा

अविनाश मनीषा अविनाश सुभाष

सुभाष