कोच्चि, 17 जुलाई (भाषा) केरल सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया है कि शबरिमला मंदिर में श्रद्धालुओं को वितरित किए जाने वाले पवित्र प्रसाद ‘आदिया सिष्टम घी’ की बिक्री में त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के कर्मचारियों द्वारा धन के कथित गबन के मामले में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया जाना चाहिए या नहीं, इसका पुनर्मूल्यांकन करने के लिए सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पद के एक अधिकारी को नियुक्त किया गया है।
न्यायमूर्ति राजा विजयाराघवन वी. और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की पीठ ने सरकार की इस जानकारी पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि वह लेखा परीक्षा (ऑडिट) विभाग और मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट सहित सभी अभिलेखों की जांच करे तथा मामले की विस्तृत पड़ताल करे।
अदालत ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, विशेष प्रकोष्ठ एर्नाकुलम के पुलिस अधीक्षक एवं आईपीएस अधिकारी एम. जे. सोजन को निर्देश दिया कि वह 23 सितंबर तक अदालत में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें। अदालत ने उन्हें अनुरोध के अनुसार दो महीने का समय भी प्रदान किया।
अधिकारी ने आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने सहित कुछ आवश्यक कार्रवाई करने के लिए समय मांगा था।
पीठ ने नौ जून को ‘आदिया सिष्टम घी’ की बिक्री से जुड़े धन के कथित गबन के मामले में त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के कर्मचारियों के खिलाफ आरोपों का स्वतंत्र रूप से पुनर्मूल्यांकन करने का आदेश दिया था, जिसके बाद इस अधिकारी की नियुक्ति की गई।
अदालत ने इस मामले में वीएसीबी की रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा था कि एजेंसी के निष्कर्षों से ऐसा प्रतीत होता है कि बोर्ड को हुए नुकसान की गंभीरता को कम करके आंका गया है।
वीएसीबी ने कहा था कि अभिलेखों का उचित रखरखाव नहीं होने के कारण संबंधित अवधि में मंदिर के विशेष अधिकारियों और काउंटर कर्मचारियों के रूप में कार्यरत बोर्ड के कर्मचारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करना संभव नहीं है।
वीएसीबी ने यह भी कहा था कि मामले में आरोपी बनाए गए सभी 43 कर्मचारी सामूहिक रूप से बोर्ड को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की थी।
सतर्कता ब्यूरो की इस सिफारिश से असहमति जताते हुए अदालत ने कहा था कि जब जांच में भारी वित्तीय नुकसान, लेखांकन में अस्पष्ट कमियां, संपत्ति का सुपुर्द किया जाना और उसका हिसाब देने में विफलता सामने आती है, तो मामले की गहन जांच आवश्यक हो जाती है।
उच्च न्यायालय ने सबसे पहले 17 नवंबर, 2025 से 27 दिसंबर, 2025 के बीच सन्निधानम में घी की बिक्री से जुड़े कथित गबन के कारण त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड को 17 लाख रुपये से अधिक के नुकसान के कारणों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच का आदेश दिया था।
अदालत ने यह कार्यवाही स्वतः संज्ञान लेते हुए शुरू की थी। इसका आधार त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी की वह रिपोर्ट थी, जिसमें कहा गया था कि मंदिर में बेचे गए 16,628 पैकेट ‘आदिया सिष्टम घी’ की बिक्री से प्राप्त राशि देवस्वओम बोर्ड के खाते में जमा नहीं करायी गयी।
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