देहरादून, 15 मार्च (भाषा) उत्तराखंड में नौसेना के एक पूर्व अधिकारी की विधवा के मकान में कथित लूटपाट और उसे ढहाये जाने की घटना में तत्काल कार्रवाई न करने को लेकर राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी जन्मेजय खंडूरी सहित दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश एन.एस. धानिक की अध्यक्षता वाले प्राधिकरण ने इस सप्ताह जारी आदेश में कहा कि जनवरी 2022 में देहरादून के क्लेमेंटाउन क्षेत्र स्थित पूर्व अधिकारी के मकान में हुई लूटपाट और उसे ढहाये जाने की घटना के मामले में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खंडूरी और क्लेमेंटाउन थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष नरेंद्र गहलावत के स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई।
प्राधिकरण के अनुसार, इस लापरवाही के कारण शिकायतकर्ता कुसुम कपूर को आर्थिक, शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से गंभीर क्षति पहुंची, जिससे उनके मानवाधिकारों का भी उल्लंघन हुआ।
प्राधिकरण ने आदेश में कहा कि दोनों अधिकारियों को मकान में हुई लूटपाट और उसे ढाए जाने की कार्रवाई को न रोकने और इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज न करने का दोषी पाया गया।
प्राधिकरण ने उत्तराखंड सरकार के गृह विभाग को दोनों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश करते हुए इसकी जानकारी प्राधिकरण को देने के लिए भी कहा।
आदेश की एक प्रति पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई है।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 2007 बैच के अधिकारी खंडूरी वर्तमान में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं।
पूर्व नौसेना अधिकारी कोमोडोर विनोद कुमार कपूर की विधवा कुसुम कपूर ने आरोप लगाया था कि वह पिछले लगभग 25 वर्षों से उक्त मकान में अपनी अविवाहित और मानसिक रूप से कमजोर बेटी टीना के साथ रह रही थीं।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2022 में उपचार के लिए उत्तर प्रदेश के नोएडा जाने के दौरान उनकी अनुपस्थिति में 30 से 40 हथियारबंद लोग उनके मकान में घुस गए, नौकर और किरायेदार को बंधक बना लिया, कीमती सामान लूट लिया और जेसीबी मशीन से मकान को ढहा दिया।
कुसुम कपूर ने आरोप लगाया कि घटना की सूचना पुलिस को दिए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
यह दूसरा मामला है जब प्राधिकरण ने किसी आईपीएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।
इससे पहले दिसंबर 2025 में प्राधिकरण ने 2014 बैच के अधिकारी लोकेश्वर सिंह के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
भाषा दीप्ति जितेंद्र
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