नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मसूरी के ‘नाजुक’ या पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए उसके द्वारा दिये गए निर्देशों पर कोई ‘ठोस कार्रवाई’ नहीं करने को लेकर उत्तराखंड के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।
हरित निकाय ने पिछले साल मई में यह आदेश एक ऐसे मामले का निपटारा करते हुए जारी किया था, जिसमें उसने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि 2023 की जोशीमठ आपदा मसूरी के लिए एक चेतावनी थी, जहाँ अनियोजित निर्माण कार्य लगातार जारी थे।
अधिकरण ने अपने आदेश में कहा था, ‘‘हम इस मामले का निपटारा इस निर्देश के साथ करते हैं कि उत्तराखंड राज्य 19 कार्य बिंदुओं (निवारक उपायों को लागू करने के लिए) के साथ-साथ ठोस वैज्ञानिक सिद्धांतों और प्रथाओं पर आधारित अन्य सभी उपचारात्मक उपायों को लागू करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नाजुक हिमालयी क्षेत्र का पर्यावरण उसकी वहन क्षमता से अधिक प्रभावित न हो।’’
एनजीटी ने मामले में की गई कार्रवाई को लेकर छह महीने बाद रिपोर्ट तलब की थी।
इस साल 24 मार्च को एनजीटी ने रेखांकित किया कि उसके निर्देशों के अनुपालन में राज्य के अतिरिक्त सचिव द्वारा एक रिपोर्ट दाखिल की गई थी।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्यों ए सेंथिल वेल और अफरोज अहमद की पीठ ने कहा, ‘‘रिपोर्ट का अवलोकन करने पर हमने पाया कि अधिकरण के आदेश में उल्लिखित प्रासंगिक मुद्दों के संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि, रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार द्वारा दायर की गई है, लेकिन सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई भी व्यक्ति उपस्थित नहीं है।’’
अधिकरण ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया और मामले की आगे की सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप