देहरादून, 27 जून (भाषा) उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हाल में हुई घटना के संबंध में गिरफ्तार चार निहंग सिख जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार, अगर अदालत से उन्हें जमानत मिल जाती है तो प्रशासन उन्हें उनके गृह राज्य पंजाब लौटने की अनुमति दे सकता है।
सूत्रों ने बताया कि इस कदम से 16 जून को हुए कर्णप्रयाग विवाद के बाद उपजे तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
चार निहंगों की गिरफ्तारी के बाद रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारा प्रकरण में निहंगों के साथ गतिरोध की स्थिति बन गई थी, जिसे सिख प्रतिनिधिमंडल के सहयोग से चौथे दिन 23 जून को दूर कर दिया गया था।
इसके बाद, गिरफ्तार निहंगों की रिहाई की मांग को लेकर 25 जून की रात देहरादून जिले में हिमाचल प्रदेश से लगी कुल्हाल सीमा से कुछ निहंग सिख जबरन उत्तराखंड में प्रवेश कर गए थे, जिन्हें समझा-बुझाकर वापस पांवटा साहिब भेज दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की रिहाई का फैसला पूरी तरह अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
उन्होंने बताया कि अदालत से जमानत मिलने के बाद सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी, जिसके बाद ही निहंग सिखों को उत्तराखंड छोड़कर पंजाब जाने की अनुमति दी जाएगी।
कर्णप्रयाग में 16 जून को स्थानीय लोगों और निहंग सिखों के बीच हुए मामूली विवाद के दौरान कथित तौर पर तलवार से किए गए हमले में कुछ लोग घायल हो गए थे।
इस घटना में एक निहंग सिख भी घायल हुआ था।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था और चारों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
वहीं, पुलिस ने एहतियातन कुल्हाल सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है।
पुलिस ने बताया कि सीमा पर आवाजाही सामान्य है लेकिन लगातार नजर रखी जा रही है।
भाषा दीप्ति जितेंद्र
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