आगरा और प्रयागराज की तरह शहरी अवजल पुन: इस्तेमाल योजना में शामिल हुई वाराणसी

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आगरा और प्रयागराज की तरह शहरी अवजल पुन: इस्तेमाल योजना में शामिल हुई वाराणसी

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 02:29 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 02:29 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई(भाषा) उत्तर प्रदेश की वाराणसी उन शहरों की सूची में शामिल हो गयी है जिनके पास अवजल को शोधित करके सुरक्षित दोबारा इस्तेमाल की अपनी कार्ययोजना है।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने इसे भारत में अवजल को शोधित कर उसका दोबारा इस्तेमाल करने की दिशा में एक ‘अहम’ पड़ाव करार दिया है।

वाराणसी की शोधित अवजल पुन: इस्तेमाल कार्ययोजना का अनावरण सोमवार को यहां जल संसाधन सचिवों के सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने किया। इस मौके पर जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी और जल संसाधन सचिव वी.एल. कांता राव भी मौजूद थे।

मिशन ने कहा कि ये कार्ययोजना इंगित करती है कि शोधित अवजल के सुरक्षित दोबारा इस्तेमाल (एसआरटीडब्ल्यू) पर तैयार राष्ट्रीय मसौदा वास्तविक धरातल पर आकार ले रहा है।

यह कार्ययोजना सटीक जानकारी देती है कि शोधित किया अवजल कहां-कहां इस्तेमाल के लिए भेजा जा सकता है, जैसे ताप विद्युत संयंत्र, रेलवे, शहरी उद्यानों और सिंचाई के लिए।

मिशन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत में शहरी घरों से हर दिन लगभग 72,368 मिलियन लीटर (एमएलडी) अवजल उत्पन्न होता है। इसमें से केवल 44 प्रतिशत को ही शोधित करने के लिए अवसंचना मौजूद है। इसमें से भी अवशोधित जल का अधिकतर हिस्सा दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह सचमुच एक ऐसा संसाधन है जो बर्बाद हो रहा है।’’

इसमें कहा गया है कि एसआरटीडब्ल्यू पहल, शोधित जल को बेकार मानने के बजाय उसे ‘अपना जल’मानने की दिशा में एक राष्ट्रीय प्रयास है; यानी इसे ताजे पानी की जगह सुरक्षित रूप से दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले संसाधन के तौर पर देखा जाए।

मिशन ने कहा कि नवंबर 2022 में जारी एसआरटीडब्ल्यू पर राष्ट्रीय ढांचा, एक जैसे गुणवत्ता मानक, राज्य-स्तरीय नीतियों, वित्तपोषण के तरीकों और ‘शोधन एवं निस्तारण’ से ‘शोधन एवं पुन: इस्तेमाल’ की ओर बदलाव के जरिए आधार तैयार करता है।

मिशन ने कहा कि भारत दुनिया का 13वां सबसे अधिक पानी की कमी वाला देश है, देश के अधिकतर हिस्सों में भूजल का अत्याधिक दोहन हो रहा है और इसके मद्देनजर ‘‘शोधित जल की हर बूंद का दोबारा इस्तेमाल करने का अभिप्राय है पीने, खेती और उद्योगों के लिए ताजे पानी की एक-एक बूंद बचाना।’’

भाषा धीरज नरेश

नरेश