नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने शनिवार को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नियंत्रित करने वाले संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 की स्पष्ट परिभाषा की मांग की।
संगठन ने ‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’ के मुद्दे से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय जनसंख्या प्रबंधन नीति बनाने की भी मांग की।
विहिप के महासचिव बजरंग लाल बागड़ा ने हाल ही में संपन्न अपने ‘संसद संपर्क अभियान’ के संबंध में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पर्यटन मंत्रालय के अधीन एक अलग ‘तीर्थयात्रा पर्यटन विभाग’ के गठन की भी मांग की। उन्होंने बताया कि संगठन ने कार्यक्रम के तहत विभिन्न सांसदों से संपर्क साधा था।
बागड़ा ने कहा कि संगठन ने सांसदों के समक्ष इन तीन प्रमुख मुद्दों को उठाया।
उन्होंने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के बारे में कहा कि विहिप को सैद्धांतिक रूप से संवैधानिक प्रावधानों पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने उनके कार्यान्वयन पर चिंता जताई।
विहिप महासचिव ने कहा, ‘‘सैद्धांतिक रूप से, अनुच्छेद 29 और 30 पर कोई आपत्ति नहीं है, और यह स्वागत योग्य है कि अल्पसंख्यकों को सरकार के हस्तक्षेप के बिना अपनी संस्थाओं को चलाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, चिंता इस बात को लेकर है कि व्यवहार में इन प्रावधानों को कैसे लागू किया जा रहा है, क्योंकि कई मामलों में अल्पसंख्यक संस्थानों के रूप में वर्गीकृत संस्थानों में 90 से 95 प्रतिशत हिंदू छात्र हैं, और कुछ मामलों में तो इससे भी अधिक हैं।’’
बागड़ा ने कहा कि इस तरह की संस्थाएं संवैधानिक प्रावधानों के मूल उद्देश्य को पूरा नहीं करती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मूल उद्देश्य अल्पसंख्यकों को अपने समुदाय को शिक्षित करने और अपनी परंपराओं को संरक्षित करने की अनुमति देना था, लेकिन जहां छात्रों का भारी बहुमत किसी अन्य समुदाय से संबंधित है, वहां ऐसे संस्थानों को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना जाना चाहिए।’’
उन्होंने शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के कार्यान्वयन में ‘असंतुलन’ की ओर भी ध्यान दिलाया।
विहिप ने अल्पसंख्यक दर्जे की स्पष्ट परिभाषा निर्धारित करने की मांग की।
बागड़ा ने कहा, ‘‘वर्तमान में, भले ही दो प्रतिशत से भी कम छात्र अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित हों, संस्थान अब भी इन विशेष अधिकारों का दावा करते हैं, और इसलिए एक स्पष्ट परिभाषा होनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वैकल्पिक रूप से, यदि ऐसे अधिकार जारी रहते हैं, तो हिंदू समुदाय द्वारा संचालित संस्थानों को भी इसी तरह के अधिकार दिए जाने चाहिए।’’
जनसंख्या के मुद्दे पर बागड़ा ने ‘‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’’ पर चिंता व्यक्त की और कहा कि भारत को एक स्पष्ट राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है।
विहिप महासचिव ने कहा, ‘‘भारत अब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और देश पर जनसंख्या का दबाव सहने की एक सीमा है। देश में कोई व्यापक जनसंख्या नीति लागू नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने सांसदों से आग्रह किया है कि सरकार को जनसंख्या प्रबंधन नीति तैयार करनी चाहिए और जनसंख्या की ऊपरी सीमा को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्वतंत्रता के बाद, 1951 में हुई पहली जनगणना के मुताबिक भारत की आबादी में हिंदुओं की संख्या लगभग 90 प्रतिशत थी। तब से, हर जनगणना में कुल जनसंख्या में हिंदुओं का अनुपात घटता जा रहा है।’’
बागड़ा ने दावा किया, ‘‘अगर अगले 25-30 वर्षों तक यही स्थिति बनी रही, तो 1947 में विभाजन से पहले की स्थितियों के समान एक विकृत स्थिति उत्पन्न हो सकती है।’’
तीर्थयात्रा पर्यटन पर उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बागड़ा ने कहा, ‘‘देश के लगभग तीन-चौथाई महत्वपूर्ण स्थल तीर्थयात्रा से जुड़े हैं, लेकिन सरकार का ध्यान मुख्य रूप से सामान्य पर्यटन पर केंद्रित है, और कई तीर्थ स्थलों में बुनियादी ढांचे और स्वच्छता की कमी है।’’
उन्होंने बताया कि नौ मार्च से 27 मार्च तक तीन सप्ताह तक चले इस जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान, ‘‘कुल 784 सांसदों में से हम 375 सांसदों से संपर्क करने में सफल रहे, जबकि अन्य सांसदों से उनकी व्यस्तताओं के कारण संपर्क नहीं हो सका, हालांकि हमारा प्रयास हर सांसद तक पहुंचने का था।’’
भाषा धीरज सुरेश
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