कोलकाता, 25 मार्च (भाषा) निर्वाचन आयोग ने बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय को बताया कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए अधिकारियों का तबादला और तैनाती करना उसके अधिकार क्षेत्र में है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की घोषणा के तुरंत बाद निर्वाचन आयोग द्वारा कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादलों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दलीलें देते हुए आयोग के वकील ने कहा कि याचिका की मंशा ठीक नहीं प्रतीत होती है, और इसे जनहित याचिका के रूप में नहीं माना जा सकता है।
आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संचालन में बाधा डालने वाली किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति या आपात स्थिति से निपटने के लिए विशिष्ट शक्तियां दी गई हैं।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग की पूर्ण शक्तियों को लेकर कोई प्रश्न नहीं हैं, बल्कि सवाल संविधान के अनुच्छेद 327 के तहत अधिनियमित किसी भी कानून या उपनियम से संबंधित है।
संविधान का अनुच्छेद 327 संसद को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) और राज्य विधानसभाओं (विधानसभा और विधान परिषद) के चुनावों के संबंध में कानून बनाने का अधिकार देता है।
बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्य भी हैं।
बनर्जी ने खंडपीठ के समक्ष दावा किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना आयोग का कर्तव्य है, लेकिन संवैधानिक निकाय ‘‘मनमानी और अपारदर्शी’’ तरीके से काम कर रहा है।
अदालत ने सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी है, जिस दिन इस पर फिर से सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में दावा किया है कि 15 मार्च को विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद से आयोग द्वारा 63 पुलिसकर्मियों समेत 79 अधिकारियों का तबादला किया गया है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे और मतगणना चार मई को होगी।
भाषा शफीक रंजन
रंजन