नयी दिल्ली/कोलकाता, 19 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान सुरक्षा स्थिति और लगभग दो लाख कर्मियों की तैनाती की समीक्षा करने के लिए सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के प्रमुखों ने कोलकाता में एक ‘‘अभूतपूर्व’’ उच्च स्तरीय बैठक की।
अधिकारियों ने बताया कि शनिवार (18 अप्रैल) को हुई बैठक के बाद साल्ट लेक स्थित सीआरपीएफ कार्यालय में एक ‘‘ऐतिहासिक’’ संयुक्त सम्मेलन हुआ, जहां सीएपीएफ के महानिदेशकों ने पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर ‘‘स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से उपद्रवियों से निपटने के लिए एक एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्णय लिया’’।
अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी समेत पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अलावा भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबी) की इकाइयों और कुछ अन्य राज्य पुलिस सहायक इकाइयों ने लगभग दो लाख कर्मियों को तैनात किया है।
सीएपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ‘‘चुनाव वाले राज्य में सीएपीएफ प्रमुखों द्वारा आयोजित यह एक अभूतपूर्व बैठक थी’’।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में सीएपीएफ के डीजी की ऐसी संयुक्त बैठक कभी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इन सीएपीएफ प्रमुखों ने पिछले कुछ दिनों में पश्चिम बंगाल में संयुक्त बलों के अलावा अपनी-अपनी चुनाव ड्यूटी इकाइयों का भी दौरा किया।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में भी 23 अप्रैल को एक ही चरण में चुनाव होंगे, लेकिन उस राज्य के लिए अभी तक सभी सीएपीएफ प्रमुखों की ऐसी कोई बैठक नहीं हुई है।
सीआईएसएफ ने रविवार को जारी एक बयान में कहा, ‘‘विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रदर्शन करते हुए, भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के शीर्ष नेतृत्व ने 18 अप्रैल को कोलकाता में बैठक की।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘उच्च स्तरीय संयुक्त बैठक का उद्देश्य आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए एक मजबूत, प्रौद्योगिकी आधारित सुरक्षा संरचना को अंतिम रूप देना था।’’
इसमें कहा गया है कि इस बैठक के बाद एक ‘‘ऐतिहासिक’’ शिखर सम्मेलन हुआ, जहां सीएपीएफ प्रमुखों, पश्चिम बंगाल पुलिस और निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस सलाहकारों और पर्यवेक्षकों ने राज्य में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की, विशेष रूप से 23 अप्रैल को 152 विधानसभा सीट पर होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए।
सीआईएसएफ के बयान में कहा गया है कि इन सभी बलों का प्राथमिक उद्देश्य एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है जहां प्रत्येक नागरिक बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
सीआईएसएफ के महानिदेशक (डीजी) प्रवीर रंजन ने बयान में कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में हमारा मिशन केवल नियमित सुरक्षा से कहीं बढ़कर है; यह मतपत्र की शुचिता की रक्षा करने के बारे में है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जमीनी स्तर पर तैनात कर्मियों के लिए मेरा संदेश स्पष्ट है: आप लोकतंत्र के रक्षक हैं। हमें अलग-अलग इकाइयों के रूप में नहीं, बल्कि एक एकजुट, अनुशासित और तकनीकी रूप से कुशल चुनावी बल के रूप में कार्य करना होगा।’’
भाषा देवेंद्र नरेश
नरेश