Katchatheevu Island Agreement: इंदिरा गांधी ने श्रीलंका को सौंप दी थी ये जमीन.. पड़ोसी देते हैं आसपास दिखने पर गोली मारने की धमकी..

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  • Publish Date - April 1, 2024 / 05:22 PM IST,
    Updated On - April 1, 2024 / 05:22 PM IST

What Is Katchatheevu Island Agreement

नई दिल्ली: तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच मौजूद कच्चाथीवू द्वीप एक बार फिर से चर्चा में हैं। तमिलनाडु के स्टॉलिन सरकार ने मोदी सरकार से मांग की हैं कि यह द्वीप उन्हें फिर से चाहिए। (What Is Katchatheevu Island Agreement) मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ यह द्वीप कभी भारत का हुआ करता था लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे श्रीलंका को सौंप दिया था। वही अब भारतीय मछुआरे अगर इस द्वीप में जातेहैं तो उन्हें श्रीलंका की सेना गरफ्तार कर लेती हैं। एक दौर में श्रीलंका ने यहाँ तक कह दिया था कि अगर भारतीय मछुआरें इस द्वीप पर आये तो उन्हें गोली भी मार दी जाएगी। तो आइये जानते हैं कि कच्चाथीवू को लेकर दोनों देश के बीच क्या विवाद हैं जो अबतक अनसुलझा हैं।

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दरअसल इस मामले को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसपर पीएम मोदी ने कांग्रेस को लपेटा है। पीएम ने रिपोर्ट को साझा कर कहा कि ये आंखें खोलने वाली और चौंकाने वाली है। इससे पता चल गया है कि कैसे कांग्रेस ने कच्चाथीवू को श्रीलंका को दे दिया। इससे हर भारतीय नाराज है और लोगों के मन में कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा है। पीएम ने कहा कि अब सभी को पता चल गया कि हम कभी भी कांग्रेस पर भरोसा नहीं कर सकते।

दरअसल, यह रिपोर्ट तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई के उस आरटीआई को लेकर सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि 1974 में इस द्वीप को पड़ोसी देश को तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने कैसे सौंपा था। पीएम ने इस पर कहा कि भारत की एकता और अखंडता को कमजोर करना ही कांग्रेस का 75 साल से काम करने का तरीका रहा है।

कच्चाथीवू द्वीप हिंदमहासागर के दक्षिणी छोर पर बसा है। यह रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच स्थित है और 285 एकड़ में फैला है। यहां आए दिन ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं, इस कारण यहां कोई नहीं रहता। आजादी से पहले कच्चाथीवू द्वीप भारत के अधीन था और श्रीलंका इस पर अपना दावा ठोकता रहता था।

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कच्चाथीवू द्वीप को लेकर भारत और श्रीलंका में हमेशा विवाद खड़ा रहता था। 1974 में विवाद को कम करने के लिए भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो और दिल्ली में दो बैठकें हुईं। इन बैठकों में भारत ने द्वीप को अपना बताया और सबूत भी दिए और कहा कि ये वहां के राजा नामनद के अधिकार में था। हालांकि, तत्कालीन भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि श्रीलंका का दावा भी मजबूत है। इसके बाद इंदिरा ने इसे श्रीलंका को गिफ्ट के तौर पर दे दिया।

द्वीप को श्रीलंका को सौंपने से पहले दोनों देशों में समझौता भी हुआ था। इसके तहत भारत के मछुआरे यहां अपना जाल सुखा सकते हैं और भारतीयों को यहां जाने के लिए किसी वीजा की भी जरूरत नहीं होगी। इस द्वीप का मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में भी कई बार उठा है और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। (Katchatheevu Island Agreement) हालाँकि एक दौर में इस द्वीप को लेकर दोनों देश के बीच काफी तल्खी भी नजर आई थी जब 2015 में श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने टीवी चैनल के एक इंटरव्यू में यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि अगर भारतीय मछुआरे कच्चाथीवू द्वीप वाले श्रीलंकाई जलक्षेत्र में घुसपैठ करते हैं तो उन्हें गोली मारी जा सकती है।

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भारतीय मछुआरे कई बार अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करते हुए श्रीलंका की सीमा में दाखिल हो जाते हैं। श्रीलंका सरकार उनपर कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लेती है। वहीं, उनके नौकाओं को भी जब्त कर लिया जाता है, जिससे मछुआरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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