त्रिची उपचुनाव में चुनाव नहीं लड़ूंगा, मंत्री पद की कोई इच्छा नहीं: वीसीके प्रमुख

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त्रिची उपचुनाव में चुनाव नहीं लड़ूंगा, मंत्री पद की कोई इच्छा नहीं: वीसीके प्रमुख

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 11:53 AM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 11:53 AM IST

चेन्नई, दो जून (भाषा) विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) प्रमुख थोल थिरुमावलन ने मंगलवार को ऐलान किया कि वह तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट से उपचुनाव नहीं लड़ेंगे और उनकी टीवीके कैबिनेट में मंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है।

वीसीके संस्थापक ने कहा कि वह किसी भी उपचुनाव में नहीं उतरेंगे और किसी के दबाव में नहीं आएंगे।

उन्होंने यह बयान उन अटकलों के बीच दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि टीवीके के सहयोगी दल के नेता के रूप में वह तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंच सकते हैं।

यह सीट 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में सी. जोसेफ विजय ने जीती थी। दो विधानसभा क्षेत्रों से जीत हासिल करने के बाद विजय ने चेन्नई की पेरंबूर सीट अपने पास रखने का फैसला किया और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट खाली कर दी, जिसके कारण वहां उपचुनाव जरूरी हो गया है।

थिरुमावलवन ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘मैं पूरे जोरशोर से कह रहा हूं कि मैं कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ूंगा और किसी के प्रभाव में नहीं आऊंगा।’’

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि सी. जोसेफ विजय द्वारा खाली की गई तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव उन्हें दिया गया था। साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया था कि यदि वह चुनाव जीत जाते हैं तो उन्हें सरकार में मंत्री पद दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इसे अस्वीकार कर दिया। मैं मुख्यमंत्री विजय को इस प्रस्ताव के लिए धन्यवाद देता हूं।’’

वीसीके ने वामपंथी दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के साथ मिलकर विजय नीत टीवीके को सरकार बनाने में समर्थन दिया था, जबकि कांग्रेस ने चुनाव बाद समझौते के तहत टीवीके का साथ दिया। कांग्रेस के अलावा वीसीके और आईयूएमएल के विधायकों को नयी सरकार में जगह दी गई है।

थिरुमावलवन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने टीवीके को समर्थन देने से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन से सलाह ली थी। यह समर्थन मुख्य रूप से तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लागू होने से रोकने के लिए दिया गया था।

वीसीके प्रमुख ने कहा, ‘‘चुनाव से पहले मैं विजय का कड़ा आलोचक रहा हूं और उन पर अल्पसंख्यक वोट बांटने और ‘सेक्युलर प्रोग्रेस अलायंस’ की प्रगति में बाधा डालने का आरोप भी लगाया था।’’

उन्होंने टीवीके का प्रस्ताव यह कहते हुए ठुकराया कि वह सत्ता के भूखे नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कैबिनेट में भूमिका पाने के लिए विधायक बनना जरूरी नहीं है।

भाषा

खारी मनीषा

मनीषा