नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) दिल्ली के एक न्यायाधिकरण ने एक महिला को 31.7 लाख रुपये का मुआवजा दिये जाने का आदेश दिया है जो 2019 में उत्तर प्रदेश में कार के दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट जाने पर घायल हो गयी थी और उसका एक हाथ काटना पड़ा था।
पीठासीन अधिकारी मनीष शर्मा ने हुस्न बानो बेगम की दावा याचिका पर सुनवाई करते हुए ‘रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी’ को निर्देश दिया कि वह यह याचिका दायर करने की तारीख से नौ प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ मुआवजा दे।
दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने सात अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘न्यायाधिकरण का मानना है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह साबित होता है कि दुर्घटना संबंधित वाहन को तेजी और लापरवाही से चलाने के कारण हुई थी… और इसके चलते याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं।’’
न्यायाधिकरण के अनुसार, याचिकाकर्ता हुस्न बानो बेगम 22 मई, 2019 को कार से दिल्ली से बुलंदशहर जा रही थीं, तभी जीटी रोड पर संगत ग्रीन इंटर कॉलेज के पास तेज रफ्तार गाड़ी ने एक साइकिल सवार को टक्कर मार दी और पलट गई।
न्यायाधिकरण के मुताबिक हुस्न बानो को गंभीर चोटें आईं और बाद में उन्हें अपनी बाईं बांह को कोहनी के ऊपर से कटवाना पड़ा।
न्यायाधिकरण ने माना कि यह दुर्घटना गाड़ी के चालक फैज़ान अंसारी की लापरवाही और तेज़ी से गाड़ी चलाने के कारण हुई थी। उसने कहा कि प्राथिमिकी, आरोपपत्र और रिकॉर्ड में मौजूद अन्य सबूत शिकायतकर्ता के दावे का समर्थन करते हैं।
एक विकलांगता बोर्ड ने प्रमाणित किया कि महिला के बाएं हाथ में 80 प्रतिशत स्थायी विकलांगता थी। न्यायाधिकरण ने कढ़ाई का काम करने वाली महिला की कामकाज करने की क्षमता से जुड़ी विकलांगता का आकलन 50 प्रतिशत किया।
मुआवजे की गणना करते समय, न्यायाधिकरण ने भविष्य की कमाई की क्षमता के नुकसान के लिए 12.44 लाख रुपये और कृत्रिम अंग तथा उसके भविष्य के प्रतिस्थापन की लागत के लिए 17.91 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति के आदेश दिए।
बीमा कंपनी को 30 दिनों के अदंर क्षतिपूर्ति राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है।
भाषा
राजकुमार माधव
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