मध्यम से गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिला के मृत शिशु को जन्म देने का जोखिम 27 फीसदी अधिक : अध्ययन

Ads

मध्यम से गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिला के मृत शिशु को जन्म देने का जोखिम 27 फीसदी अधिक : अध्ययन

  •  
  • Publish Date - August 5, 2026 / 05:26 PM IST,
    Updated On - August 5, 2026 / 05:26 PM IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) भारत में गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय मध्यम से गंभीर एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित महिलाओं के 28 हफ्ते की गर्भावस्था के बाद मृत शिशु को जन्म देने का जोखिम 27 प्रतिशत अधिक हो सकता है। ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

अध्ययन के नतीजों से यह भी पता चलता है कि गंभीर एनीमिया वाली गर्भवती महिलाओं में मृत शिशु का जन्म गर्भावस्था के 29वें हफ्ते के आसपास हो सकता है, जबकि अन्य महिलाओं में यह 31वें हफ्ते के आसपास होता है।

ब्रिटेन स्थित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन और बेंगलुरु स्थित भारतीय जन स्वास्थ्य संस्थान के शोधकर्ताओं ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया मृत शिशु के जन्म का एक महत्वपूर्ण और ऐसा जोखिम कारक है, जिसे ठीक किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मृत शिशु के जन्म की घटनाओं को कम करने के लिए बनाई जाने वाली नीतियों में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम और इलाज की व्यापक रणनीतियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

एनीमिया खून से जुड़ी एक स्थिति है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है या हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है।

टीम ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के ‘स्टिलबर्थ पूल्ड इंडियन कोहोर्ट कंसोर्टियम’ (एसपीआईसी) के डेटासेट का अध्ययन किया। इसमें कुल 2,14,709 ऐसी गर्भधारण की घटनाएं शामिल थीं जिनमें एक भ्रूण था और जिनके जन्म के नतीजे और गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन के स्तर की जानकारी उपलब्ध थी।

कुल मिलाकर, लगभग 1,08,982 महिलाओं (52 प्रतिशत) में मध्यम से गंभीर एनीमिया था, यानी हीमोग्लोबिन का स्तर 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम था – और कुल 3,595 (1.7 प्रतिशत) मामलों में मृत शिशु का जन्म हुआ।

शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट ने लिखा, ‘‘जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कभी भी मध्यम से गंभीर एनीमिया था, उनमें गर्भावस्था के 28 हफ्ते के बाद मृत शिशु के जन्म का जोखिम 27 फीसदी अधिक था।’’

उन्होंने कहा कि एनीमिया से मामूली रूप से पीड़ित या एनीमिया रहित महिलाओं की तुलना में गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं में मृत शिशु के जन्म (स्टिलबर्थ) का जोखिम तीन गुना बढ़ सकता है, जबकि मध्यम एनीमिया से पीड़ित महिलाओं में गर्भावस्था के किसी भी चरण में यह जोखिम अपेक्षाकृत 1.2 गुना बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि एनीमिया की अलग-अलग गंभीरता और गर्भावस्था की विभिन्न तिमाहियों को कवर करने वाले विविध अध्ययन परिवेश से सीमित सामान्यीकृत प्रमाण उपलब्ध हैं।

इस अध्ययन में मल्टी-कोहोर्ट डेटासेट का उपयोग किया गया है, जिसमें आईसीएमआर-एसपीआईसी के तहत भारत के दस राज्यों में किए गए आठ ऑब्जर्वेशनल अध्ययन और दो यादृच्छिक रूप से किए गए नियंत्रित परीक्षण (कंट्रोल ट्रायल्स) से प्राप्त व्यक्तिगत स्तर का डेटा शामिल है।

लेखकों ने कहा कि अध्ययन से मिले प्रमाण भारत में मां के एनीमिया से पीड़ित होने और मृत शिशु के जन्म लेने के बीच संबंध को और मजबूत करते हैं।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप