फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेंगे : न्यायालय ने अरावली विवाद पर कहा

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फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेंगे : न्यायालय ने अरावली विवाद पर कहा

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  • Publish Date - May 15, 2026 / 01:35 PM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 01:35 PM IST

नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि उसे अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला में खनन को लेकर ‘‘काफी चिंताजनक’’ प्रतिक्रियाएं मिल रही है, जिसे देखते हुए वह फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेगा।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इस मामले में विशेष पारिस्थितिकीय मुद्दे जुड़े हुए हैं और फरवरी में उसने पर्यावरण मंत्रालय तथा अन्य पक्षकारों से अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला की परिभाषा तय करने के लिए एक समिति के वास्ते संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा था।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामले का उल्लेख किए जाने पर कहा, ‘‘हम इस मामले की टुकड़ों में सुनवाई नहीं करेंगे। जब तक हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं देंगे।’’

उच्चतम न्यायालय ‘‘अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा और संबंधित मुद्दे’’ शीर्षक से स्वतः संज्ञान लेते हुए एक मामले की सुनवाई कर रहा है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वहां बहुत कुछ हो रहा है। हमें जो प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, वे काफी चिंताजनक हैं।’’

पीठ ने मामले का उल्लेख करने वाले वकील से कहा कि यदि किसी खनन पट्टे को रद्द किया जाता है, तो संबंधित पक्ष उसे चुनौती दे सकता है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम अभी खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेंगे। यह एक संवेदनशील मामला है।’’

न्यायालय ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला की एक समान परिभाषा स्वीकार करते हुए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में इसके दायरे में आने वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक नए खनन पट्टे देने पर रोक लगा दी थी।

न्यायालय ने दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत शृंखला की सुरक्षा के लिए इसकी परिभाषा को लेकर मंत्रालय की समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था।

समिति ने सिफारिश की थी कि ‘‘अरावली पहाड़ी’’ उस भू-आकृति को माना जाए, जिसकी ऊंचाई निर्धारित अरावली जिलों में स्थानीय भू-स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक हो, जबकि ‘‘अरावली पर्वतमाला’’ ऐसी दो या अधिक पहाड़ियों का समूह होगा, जो एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर स्थित हों।

उच्चतम न्यायालय ने 29 दिसंबर को अरावली की नयी परिभाषा को लेकर उठे विरोध का संज्ञान लेते हुए 20 नवंबर के अपने आदेश को स्थगित कर दिया था, जिसमें पहाड़ियों और पर्वतमाला की एक समान परिभाषा स्वीकार की गई थी। न्यायालय ने सभी खनन गतिविधियों पर भी रोक लगा दी थी।

न्यायालय ने कहा था कि “गंभीर अस्पष्टताओं” को दूर करने की जरूरत है, जिनमें यह सवाल भी शामिल है कि 100 मीटर ऊंचाई और पहाड़ियों के बीच 500 मीटर की दूरी का मानदंड कहीं पर्वतमाला के बड़े हिस्से को पर्यावरणीय संरक्षण से वंचित तो नहीं कर देगा।

पीठ ने कहा था, ‘‘पर्यावरणविदों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला है। उन्होंने नयी परिभाषा और अदालत के निर्देशों की संभावित गलत व्याख्या और अनुचित क्रियान्वयन को लेकर गहरी चिंता जताई है।’’

भाषा गोला वैभव

वैभव