नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि देश में श्रमिकों को ‘‘सबसे कम पारिश्रमिक’’ मिलता है और उनके शारीरिक श्रम को महत्व एवं सम्मान देने में समाज नाकाम रहा है।
उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई के दौरान आई। व्यक्ति ने एक श्रमिक पर हमला करने के मामले में अपनी सजा और पांच साल की जेल की सजा को चुनौती दी थी। यह घटना उस वक्त हुई थी जब पीड़ित व्यक्ति सोने की कोशिश कर रहा था और उसने दोषी एवं अन्य लोगों द्वारा किये जा रहे शोर-शराबा को लेकर आपत्ति जताई थी।
उच्च न्यायालय ने दोषी वीर पाल की सजा को हत्या की कोशिश के अपराध से बदलकर खतरनाक हथियारों से जान-बूझकर चोट पहुंचाने के अपराध में बदल दिया। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों से यह साबित नहीं हुआ कि उसमें हत्या की कोशिश का अपराध मानने के लिए जरूरी इरादा था।
अदालत ने पांच साल की जेल की सजा को घटाकर तीन साल कर दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘दिन भर की बेहद कड़ी मेहनत के बाद शरीर को फिर से ऊर्जावान करने के लिए रात में अच्छी और सुकून भरी नींद की जरूरत होती है, ताकि शरीर अगले दिन काम करने के लिए तैयार हो सके, जिस दौरान अक्सर कड़ी शारीरिक मेहनत करनी होती है।’’
न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने 18 सितंबर को पारित अपने निर्णय में कहा, ‘‘यह देश में श्रमिकों की एक आम और कभी न खत्म होने वाली स्थिति बन गई है और जले पर नमक छिड़कने वाली बात यह है कि इस वर्ग को सबसे कम वेतन मिलता है, उनकी सबसे कम सुध ली जाती है और सबसे कम परवाह की जाती है।’’
अदालत ने कहा कि यह ‘‘बहुत ही दुखद स्थिति है कि हमारा समाज शारीरिक श्रम को सम्मान और महत्व देने में नाकाम रहा है, जबकि पश्चिमी देशों में शारीरिक श्रम के लिए उचित पारिश्रमिक मिलता है और महत्व दिया जाता है।’’
यह घटना 17 मार्च 2002 की रात हुई थी, जब पीड़ित राजिंदर कुमार चांदनी चौक के लाजपत राय बाजार में उस दुकान के बरामदे में सोने ही वाले थे या सो रहे थे, जहां वह काम करते थे।
अदालत ने गौर किया कि पाल और अन्य लोगों के शोर-शराबा करने से पीड़ित व्यक्ति परेशान हो गया और उसने उनसे ऐसा व्यवहार न करने का आग्रह किया। लेकिन इससे दोषी व्यक्ति भड़क गया, उसने पीड़ित को धक्का दिया और एक धारदार हथियार से उस पर हमला कर दिया।
अदालत ने पाया कि दोषी ने पीड़ित को घायल करने के लिए ‘रापी’ (मोची द्वारा चमड़ा काटने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले औजार) का इस्तेमाल किया था।
अधीनस्थ अदालत ने पाल को दोषी करार देते हुए पांच साल कैद की सजा सुनाई थी।
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