West Bengal Assembly Election 2026: बंगाल में कोई माई का लाल नहीं बना सकता बाबरी मस्जिद, मतदान से पहले गृह मंत्री शाह ने भरी हुंकार

West Bengal Assembly Election 2026: बंगाल में कोई माई का लाल नहीं बना सकता बाबरी मस्जिद, मतदान से पहले गृह मंत्री शाह ने भरी हुंकार

West Bengal Assembly Election 2026: बंगाल में कोई माई का लाल नहीं बना सकता बाबरी मस्जिद, मतदान से पहले गृह मंत्री शाह ने भरी हुंकार

West Bengal Assembly Election 2026|| Image- ANI News File

Modified Date: April 14, 2026 / 11:04 pm IST
Published Date: April 14, 2026 11:03 pm IST

West Bengal Assembly Election 2026: मालदा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद कोई माई का लाल राज्य में बाबरी मस्जिद से मिलती-जुलती मस्जिद का निर्माण नहीं करा पाएगा। गृह मंत्री  शाह ने विधानसभा चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों को चुनौती दे रहे आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का “एजेंट” तक करार दिया। कबीर ने मालदा से सटे मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में बाबरी मस्जिद से मिलती-जुलती मस्जिद के निर्माण का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद उन्हें पिछले साल दिसंबर में तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था।

गृह मंत्री शाह ने हुमायूं कबीर पर लगाए आरोप

गृह मंत्री शाह ने आरोप लगाया कि कबीर अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण के लिए तृणमूल सुप्रीमो के “इशारे पर काम कर रहे हैं।” उन्होंने मालदा के गाजोल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, “ममता दीदी और हुमायूं कबीर मेरी बात ध्यान से सुनें! यह भारत है और कोई भी माई का लाल यहां बाबरी मस्जिद नहीं बना सकता!” (West Bengal Assembly Election 2026) इससे पहले, गृह मंत्री शाह ने मालदा के मानिकचक इलाके में आयोजित चुनावी रैली में कहा, “हुमायूं कबीर को मेरी बात कान खोलकर सुननी चाहिए कि भाजपा (बाबरी जैसी) मस्जिद का निर्माण नहीं होने देगी। ममता बनर्जी और उनके भतीजे (अभिषेक बनर्जी) को भी पता हो जाना चाहिए कि उस मस्जिद को बनाने का उनका सपना पांच मई को चकनाचूर हो जाएगा।”

दो चरणों में होगा मतदान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा। वोटों की गिनती चार मई को की जाएगी। कबीर ने पिछले साल छह दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 33वीं बरसी पर बेलडांगा में बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखी थी। इस परियोजना ने पूरे राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। यह मस्जिद लगभग आठ एकड़ निजी भूमि पर बनाई जा रही है और परियोजना की अनुमानित लागत 86 करोड़ रुपये है। सोमवार को बीरभूम और पश्चिम बर्धमान जिलों में कई जनसभाओं को संबोधित करते हुए गृह मंत्री शाह ने आरोप लगाया था कि ममता और कबीर “एक ही थाली के चट्टे-बट्टे” हैं।

राम मंदिर के निर्माण का ममता ने किया था विरोध

पश्चिम बर्धमान जिले के कोयला खदान क्षेत्र रानीगंज में आयोजित एक चुनावी रैली में गृह मंत्री शाह ने ममता पर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का विरोध करने का आरोप लगाया था। उन्होंने तृणमूल सुप्रीमो के इस कदम और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाने के कबीर के प्रस्ताव के बीच समानता दर्शाने की कोशिश की थी। (West Bengal Assembly Election 2026)  गृह मंत्री शाह ने कहा था, “कांग्रेस, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक), समाजवादी पार्टी (सपा) तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जैसी अन्य पार्टियों ने रामलला को 550 वर्षों तक तंबू में रखने का समर्थन किया था।” उन्होंने कहा था, “2019 में भारी जनादेश मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराया, जिसका ममता जैसे नेताओं ने विरोध किया। अब ममता की तरह की सोच रखने वाले हुमायूं कबीर बंगाल में बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते हैं।”

गृह मंत्री की टिप्पणियों को उस वीडियो को लेकर तृणमूल कांग्रेस के हमलों को कुंद करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें कबीर को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया था कि वह ममता को सत्ता से बेदखल करने और अल्पसंख्यक मतों के विभाजन के लिए हुए 1,000 करोड़ रुपये के समझौते के तहत 200 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि हासिल करने के लिए भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। ममता ने वीडियो में की गई कथित टिप्पणियों के आधार पर रविवार को आरोप लगाया कि भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को हराने के लिए हुमायूं के साथ “1,000 करोड़ रुपये का सौदा” किया है। (West Bengal Assembly Election 2026) गृह मंत्री शाह ने ममता के आरोपों का जोरदार खंडन करते हुए कहा था कि भाजपा कबीर के साथ गठबंधन करने के बजाय “20 साल तक विपक्ष में बैठना पसंद करेगी।” उन्होंने कहा था कि दोनों पक्ष वैचारिक रूप से “उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव की तरह ही एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत” हैं।

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