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नई दिल्ली : Vande Bharat महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सियासी घमासान तेज है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को क्रेडिट का ब्लैंक चेक थमा दिया है, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने परिसीमन और जनगणना के बहाने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर पीएम ने ऐसा क्यों कहा कि विरोध करने वालों को कभी माफी नहीं मिली? महिला आरक्षण बिल यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। पीएम ने दो टूक कहा है कि जिसने भी इस अधिकार का विरोध किया, जनता ने उसका हाल बुरा कर दिया और उन्हें कभी माफी नहीं मिली।
पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि उन्हें इस ऐतिहासिक कदम का क्रेडिट नहीं चाहिए। उन्होंने सदन में कहा- “मैं आपको क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं। पीएम ने यहां तक कह दिया कि बिल पारित होने के बाद वे विज्ञापनों में विपक्ष की फोटो छपवा देंगे, बस इस शुभ काम में अड़ंगा न डाला जाए।
लेकिन विपक्ष इस ‘गारंटी’ पर भरोसा करने को तैयार नहीं है। कांग्रेस ने सीधा सवाल दागा है कि जब नया सेंसस यानी जनगणना होने वाली है, तो इसे परिसीमन से जोड़कर देरी क्यों की जा रही है? वहीं समाजवादी पार्टी के सांसदों ने इसे भाजपा का ‘चुनावी एजेंडा’ बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। अब देखना ये होगा कि ‘प्रायश्चित’ और ‘अधिकार’ की इस लड़ाई में क्या विपक्ष ‘क्रेडिट का ब्लैंक चेक’ स्वीकार करेगा या फिर परिसीमन का ये मुद्दा 2026 के सियासी मैदान में और गरमाएगा।