Bashir Badr Passes Away/Image: AI Generated
भोपाल: Bashir Badr Passes Away मशहूर शायर और पद्मश्री से सम्मानित बशीर बद्र का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और भोपाल के ईदगाह हिल्स इलाके में सेंट पॉल स्कूल के पीछे स्थित अपने घर में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य और उर्दू शायरी की दुनिया में शोक की लहर है। वही, उनके निधन पर मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुःख जाहिर किया है, उन्होंने कहा कि मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।
सीएम मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया X पर पोस्ट शेयर कर लिखा कि, ‘पद्म श्री’ से सम्मानित, प्रसिद्ध शायर डॉ. बशीर बद्र जी के निधन पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन को संवेदनशीलता, अपनत्व और मानवता के साथ जीने का संदेश दिया। अपनी शायरी से जिंदगी को बेहद आसान बनाने के सूत्र दिए। ईश्वर दिवंगत को शांति और परिजनों व प्रशंसकों को यह दु:ख सहने की शक्ति दें।
'पद्म श्री' से सम्मानित, प्रसिद्ध शायर डॉ. बशीर बद्र जी के निधन पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।
उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन को संवेदनशीलता, अपनत्व और मानवता के साथ जीने का संदेश दिया। अपनी शायरी से जिंदगी को बेहद आसान बनाने के…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 28, 2026
पिछले कई दिनों से चल रहे थे अस्वस्थ्य
बताया जा रहा है कि मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र (Bashir Badr Passes Away ) पिछले कई दिनों से अस्वस्थ्य चल रहे थे। जिसके चलते उनका इलाज भी जारी था, लेकिन आज उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन से दुनिया भर में लाखों चाहने वाले शोक में डूब गए हैं। उनकी शायरी ने मोहब्बत, तन्हाई, इंतज़ार और ज़िंदगी के गहरे ज़ख़्मों को शब्द दिए।
15 फरवरी, 1935 को अयोध्या में जन्मे डॉ. बशीर बद्र (Bashir Badr Passes Away ) ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से B.A., M.A. और Ph.D. की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने अपने अकादमिक करियर की शुरुआत अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के तौर पर की और बाद में लगभग 17 वर्षों तक मेरठ कॉलेज, मेरठ में उर्दू विभाग के लेक्चरर और विभागाध्यक्ष के रूप में सेवा की।
उर्दू, फ़ारसी, हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं पर अपनी ज़बरदस्त पकड़ के लिए मशहूर बशीर बद्र ने महज़ सात साल की छोटी उम्र में ही शायरी लिखना शुरू कर दिया था। समय के साथ, वह एक ऐसे अग्रणी साहित्यिक हस्ती के रूप में उभरे, जिनकी शायरी में जज़्बाती गहराई के साथ-साथ अभिव्यक्ति की सादगी भी थी, जिसने उर्दू शायरी को आम पाठक के लिए सुलभ बना दिया।
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