Atithi Shikshak News Today: गुरु पूर्णिमा से पहले अतिथि शिक्षकों की पूरी हुई मुराद, नियमितीकरण सहित सरकार से कर रहे थे ये मांग, शिक्षा मंत्री ने दी अहम जानकारी

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Atithi Shikshak News Today: गुरु पूर्णिमा से पहले अतिथि शिक्षकों की पूरी हुई मुराद, नियमितीकरण सहित सरकार से कर रहे थे ये मांग, शिक्षा मंत्री ने दी अहम जानकारी

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  • Publish Date - July 26, 2026 / 10:31 AM IST,
    Updated On - July 26, 2026 / 11:13 AM IST

Atithi Shikshak News Today: गुरु पूर्णिमा से पहले अतिथि शिक्षकों की पूरी हुई मुराद, नियमितीकरण सहित सरकार से कर रहे थे ये मांग, शिक्षा मंत्री ने दी अहम जानकारी / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • अतिथि शिक्षकों के हित में सरकार का बड़ा फैसला
  • अतिथि शिक्षकों की 90% ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता खत्म
  • पूरे शैक्षणिक सत्र में 10 आकस्मिक अवकाश (CL) देने का फैसला

भोपाल: Atithi Shikshak News Today प्रदेश के अतिथि शिक्षकों को रिज्वाइनिंग के लिए सरकार की ओर से रखी गई शर्त मुसीबत बन गई थी। कई शिक्षकों के रोजगार पर संकट मंडराने लगा था। लेकिन अब प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने उनकी समस्याओं को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को खत्म करने के साथ ही सत्र के दौरान आकस्मिक अवकाश (CL) की सुविधा देने का भी फैसला लिया है। अतिथि शिक्षकों को पूरे सत्र में कुल 10 आकस्मिक अवकाश देने का निर्णय लिया है। इस बात की जानकारी खुद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कर दी है। सरकार का ये फैसला अतिथि शिक्षकों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है।

 

अतिथि शिक्षकों की मुराद पूरी

Atithi Shikshak News Today शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जानकारी देते हुए कहा है ​कि ”अतिथि शिक्षकों को उनकी कार्य-सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने सत्र के दौरान कुल 10 आकस्मिक अवकाश (CL) प्रदान करने का निर्णय लिया है। अतिथि शिक्षक साथियों को कार्यभार ग्रहण करते ही 1 दिवस की CL पात्रता होगी। साथ ही प्रत्येक 30 दिवस का कार्य पूर्ण होने पर 1 अतिरिक्त CL अर्जित होगी। अतिथि शिक्षक सत्र के दौरान उपलब्ध अवकाश में से एक बार में अधिकतम 3 CL ले सकेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश के शिक्षकों के हितों की रक्षा और उनके कार्य परिवेश को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने हेतु विभाग को निर्देशित किया गया है।

90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता खत्म

बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को जारी आदेश में स्कूलों में पढ़ाने वाले प्रदेश के पांच हजार ऐसे शिक्षकों के हित में लोक शिक्षण आयुक्त ने फैसला लिया था कि जिनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत नहीं होने के कारण इस शिक्षा सत्र में विद्यालय में री-जॉइन नहीं हो पा रही थी, ऐसे शिक्षकों को री-जॉइन के लिए 90 प्रतिशत अटेंडेंस से छूट दी जाएगी। इसके बाद अब शिक्षक विद्यालयों में री-जॉइन कर सकेंगे, लेकिन इसके बाद उन्हें लगातार ई-अटेंडेंस लगानी ही होगी। इस आदेश में लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने सभी संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और संकुल प्राचार्य, हायर सेकेंडरी व हाई स्कूल को दिए निर्देश में कहा है कि 30 जून 2026 को जारी आदेश में री-जॉइनिंग के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य की गई थी।

अतिथि शिक्षकों की ये मांगें अभी भी लंबित

  • नियमितीकरण के लिए विशेष परीक्षा और रिक्त पदों में आरक्षण
  • शिक्षक भर्ती में बोनस अंक और पात्रता में छूट
  • स्कोर कार्ड में अनुभव अंकों की वृद्धि
  • 12 माह का वार्षिक अनुबंध और सेवा निरंतरता
  • सामाजिक सुरक्षा : बीमा, पीएफ और स्वास्थ्य सुविधाएं
  • ई-अटेंडेंस सुधार और लंबित मानदेय का भुगतान

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अतिथि शिक्षकों के लिए सरकार ने क्या नई घोषणा की है?

सरकार ने अतिथि शिक्षकों को पूरे सत्र में 10 आकस्मिक अवकाश (CL) देने और 90% ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त करने का फैसला किया है।

अतिथि शिक्षकों को 10 CL कैसे मिलेंगी?

कार्यभार ग्रहण करते ही 1 CL मिलेगी। इसके बाद प्रत्येक 30 दिन का कार्य पूरा होने पर 1 अतिरिक्त CL अर्जित होगी। पूरे सत्र में अधिकतम 10 CL मिलेंगी।

एक बार में कितनी CL ली जा सकती है?

अतिथि शिक्षक एक बार में अधिकतम 3 आकस्मिक अवकाश (CL) ले सकेंगे।

90% ई-अटेंडेंस हटाने से क्या फायदा होगा?

जिन अतिथि शिक्षकों की 90% ई-अटेंडेंस नहीं होने के कारण री-जॉइनिंग अटक गई थी, वे अब विद्यालय में दोबारा कार्यभार ग्रहण कर सकेंगे। हालांकि री-जॉइनिंग के बाद नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज कराना आवश्यक होगा।

अतिथि शिक्षकों की कौन-कौन सी मांगें अभी लंबित हैं?

नियमितीकरण के लिए विशेष परीक्षा, शिक्षक भर्ती में बोनस अंक, अनुभव अंकों में वृद्धि, 12 माह का वार्षिक अनुबंध, सामाजिक सुरक्षा (PF, बीमा, स्वास्थ्य सुविधा) और लंबित मानदेय भुगतान जैसी मांगें अभी भी लंबित हैं।