CM Mohan Yadav Kuno Park Visit: MP को ‘वाइल्डलाइफ लीडर’ बना रहे सीएम डॉ. मोहन यादव, इतने मादा चीतों को आज वन क्षेत्र में करेंगे मुक्त

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CM Mohan Yadav Kuno Park Visit: MP को 'वाइल्डलाइफ लीडर' बना रहे सीएम डॉ. मोहन यादव, इतने मादा चीतों को आज वन क्षेत्र में करेंगे मुक्त

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  • Publish Date - May 10, 2026 / 01:34 PM IST,
    Updated On - May 10, 2026 / 01:42 PM IST

CM Mohan Yadav Kuno Park Visit/Image Source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • कूनो नेशनल पार्क में चीतों को जंगल में छोड़ने की तैयारी, प्रोजेक्ट चीता का नया चरण शुरू
  • मध्यप्रदेश में टाइगर रिजर्व, गिद्ध संरक्षण और नए अभ्यारण्यों का तेजी से विस्तार
  • वन्यजीव संरक्षण से इको-टूरिज्म और ग्रामीण रोजगार को मिला बड़ा बढ़ावा

भोपाल CM Mohan Yadav Kuno Park Visit: पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10-11 मई को श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क के भ्रमण पर रहेंगे। इस दौरान वे बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को उनके बाड़े से वन क्षेत्र में मुक्त करेंगे। इस तरह मध्यप्रदेश ने एक बार फिर साबित किया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संरक्षण के प्रति संवेदनशील नेतृत्व साथ आए तो वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बन सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य आज वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में प्रदेश देशभर के लिए एक मॉडल बनता दिखाई दे रहा है।

गौरतलब है कि, दिसंबर-2023 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav Kuno Park Visit) ने वन्यजीव संरक्षण को केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं माना, बल्कि इसे सांस्कृतिक विरासत-जैव विविधता-पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखा। यही कारण है कि बीते डेढ़ वर्षों में मध्यप्रदेश में अभूतपूर्व निर्णय लिए गए। सबसे बड़ा फैसला रातापानी टाइगर रिजर्व को देश का 8वां और प्रदेश का नया टाइगर रिजर्व घोषित करना रहा। वर्ष 2008 में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी से अनुमति मिलने के बावजूद यह प्रस्ताव करीब 17 वर्षों तक लंबित रहा, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में इसे मंजूरी मिली। इतना ही नहीं, विश्व धरोहर भीम बैठका की खोज करने वाले पुरातत्वविद् विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर इसका नामकरण कर संरक्षण को सांस्कृतिक गौरव से भी जोड़ा गया। रातापानी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह देश का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व है, जो किसी राज्य की राजधानी के सबसे करीब स्थित है। इससे संरक्षण और इको-टूरिज्म दोनों को नई दिशा मिलने की संभावना है।

माधव टाइगर रिजर्व : मानव और वन्यजीव संघर्ष कम करने की पहल

मार्च-2025 में माधव टाइगर रिजर्व को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार का निर्माण केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की व्यावहारिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में संरक्षण की सबसे बड़ी चुनौती अब शिकार नहीं, बल्कि मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ता टकराव है। ऐसे में यह पहल भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम मानी जा रही है।

गिद्ध संरक्षण में देश का नेतृत्व

कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे गिद्धों की वापसी में मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। आज राज्य में 14 हजार से अधिक वल्चर मौजूद हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वन विहार नेशनल पार्क के सहयोग से भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा मुक्त किया गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक की लंबी उड़ान पूरी कर चुका है, जो इस संरक्षण अभियान की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है।

कूनो : अब केवल चीता परियोजना नहीं, वैश्विक संरक्षण प्रयोगशाला

कूनो नेशनल पार्क में किए जा रहे कार्य आज पूरी दुनिया के संरक्षण वैज्ञानिकों की नजर में है। ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता के बाद यहां चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। भारत में दशकों बाद चीतों की वापसी ने यह संदेश दिया है कि यदि सही वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक प्रतिबद्धता हो तो विलुप्त प्रजातियों का पुनर्वास संभव है। अब कूनो को ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके साथ ही गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी को चीतों के दूसरे आवास और नौरादेही वाइल्डलाइफ सेंचुरी को तीसरे बड़े चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है। नौरादेही में सॉफ्ट रिलीज बोमा निर्माण का भूमिपूजन इस परियोजना के अगले चरण की शुरुआत माना जा रहा है।

नए अभ्यारण्य : संरक्षण का विस्तारित भूगोल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav Kuno Park Visit) की सरकार ने वन क्षेत्रों के विस्तार और संवेदनशील जैव विविधता क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में भी तेज फैसले लिए। अप्रैल 2025 में सागर जिले में 258.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित किया गया। इसके अलावा ओंकारेश्वर और जहानगढ़ में दो नए वन्यजीव अभ्यारण्यों को स्वीकृति दी गई। ये फैसले केवल नए संरक्षित क्षेत्र जोड़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य के वन्यजीव कॉरिडोर और जैव विविधता सुरक्षा नेटवर्क की नींव भी माने जा रहे हैं।

ताप्ती बना प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व

अगस्त 2025 में ताप्ती क्षेत्र को मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करना भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बैतूल जिले के इस क्षेत्र में टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियों की उपस्थिति इसे अत्यंत संवेदनशील बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार कंजर्वेशन रिजर्व मॉडल स्थानीय समुदाय और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का आधुनिक तरीका माना जाता है।

घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण पर फोकस

नेशनल चंबल सेंचुरी दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी शरणस्थली मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव (CM Mohan Yadav Kuno Park Visit) द्वारा हाल ही में कूनो नदी में घड़ियाल और कछुए छोड़े गए, जबकि नर्मदा नदी में मगरमच्छों की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष पहल शुरू की गई है। ओंकारेश्वर क्षेत्र में मगरमच्छ छोड़े जाने को नर्मदा के इको-सिस्टम के दोबारा संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विलुप्त जंगली भैंसों की वापसी

काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व में बसाना मध्यप्रदेश के संरक्षण इतिहास का ऐतिहासिक अध्याय माना जा रहा है। यह केवल प्रजाति पुनर्वास नहीं, बल्कि खो चुकी जैव विविधता को वापस लाने का प्रयास है।

हाथी संरक्षण : संघर्ष से सह-अस्तित्व की ओर

राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष कम करने के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक योजना को मंजूरी दी है। ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग, सोलर फेंसिंग और राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि मध्यप्रदेश अब केवल संकट के बाद प्रतिक्रिया देने की बजाय वैज्ञानिक और दीर्घकालिक प्रबंधन मॉडल की ओर बढ़ रहा है। विशेष रूप से मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना वन्यजीव संरक्षण के प्रति सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में अहम निर्णय माना जा रहा है।

टाइगर कॉरिडोर : भविष्य का संरक्षण मॉडल

वन्यजीव संरक्षण में अब केवल रिजर्व बनाना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उनके बीच सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसी सोच के तहत मध्यप्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली 5500 करोड़ रुपये से अधिक की मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर काम चल रहा है। एनएच-46 पर इटारसी-बैतूल सेक्शन में बनाए जा रहे अंडरपास और ओवरपास भविष्य के ‘वाइल्डलाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर’ का उदाहरण माने जा रहे हैं।

वन्यजीव संरक्षण के लिए विशेष मार्ग

वन्यजीवों की सड़क दुर्घटना में होने वाली मृत्यु को रोकने के लिए भी टाइगर रिजर्व में विविध प्रयोग किए जा रहे हैं जैसे एनएचएआई द्वारा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से गुजरे नेशनल हाईवे पर दो किलोमीटर सड़क पर वन्यजीव के वाहनों से हादसे रोकने सड़क पर बनाए गए ‘रेड ब्लॉक’ बनाए गए हैं। इन्हें ‘टेबल टॉप मार्किंग’ बोला जाता है। इससे गुजरते समय हल्के झटके महसूस होते हैं जिससे वाहनों की गति नियंत्रित रहती है।

साउंडप्रूफ कॉरिडोर – रातापानी टाइगर रिजर्व के जंगलों से गुजरे हाइवे के 12 किलोमीटर सड़क को पूरी तरह से साउंडप्रूफ कॉरिडोर के रूप में तैयार किया गया है। 12 किमी के दौरान वन्य जीवों के लिए 7 अंडरपास बनाए गए हैं। चारों ओर हरा-भरा जंगल और सड़क के दोनों तरफ 3-3 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल बनाई गई हैं, जोकि पूरी तरह साउंड प्रूफ हैं। इस तरह के नवाचार आधुनिक विकास के साथ वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का कार्य करते हैं।

संरक्षण से रोजगार तक

वन्यजीव संरक्षण का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिला। चीता परियोजना, टाइगर रिजर्व विस्तार और इको-टूरिज्म गतिविधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और पर्यटन को नई गति दी है। आज मध्यप्रदेश केवल “टाइगर स्टेट” नहीं, बल्कि समग्र वन्यजीव संरक्षण मॉडल के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है। और इस परिवर्तन के केंद्र में है, संरक्षण को विकास, संस्कृति और स्थानीय भागीदारी से जोड़ने की वह सोच, जिसने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

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कूनो नेशनल पार्क में क्या खास होने वाला है?

कूनो नेशनल पार्क में 10-11 मई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को उनके बाड़े से जंगल क्षेत्र में मुक्त करेंगे, जो चीता पुनर्वास परियोजना का अहम चरण है।

मध्यप्रदेश में चीता परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?

यह परियोजना भारत में विलुप्त हो चुके चीतों की वापसी का ऐतिहासिक प्रयास है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़कर 57 तक पहुंचना इस कार्यक्रम की बड़ी सफलता मानी जा रही है।

क्या कूनो को वैश्विक संरक्षण केंद्र बनाया जा रहा है?

हाँ, कूनो नेशनल Park को अब ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का मॉडल बन सके।

मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के और कौन से बड़े कदम उठाए गए हैं?

राज्य में नए टाइगर रिजर्व, कंजर्वेशन रिजर्व, गिद्ध संरक्षण केंद्र, हाथी मित्र योजना और टाइगर कॉरिडोर जैसी कई बड़ी परियोजनाएँ शुरू की गई हैं।

क्या इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को फायदा हो रहा है?

हाँ, इको-टूरिज्म और वन्यजीव परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ा है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।