Contract Employee Regularization in Madhya Pradesh || Image- IBC24 NEWS Archive
भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश की बिजली कंपनियों में काम करने वाले 6,500 से ज्यादा संविदा अधिकारी और कर्मचारी अब नियमित हो सकेंगे। (Contract Employee Regularization in Madhya Pradesh) इसके लिए उन्हें विभागीय परीक्षा पास करनी होगी। ऊर्जा विभाग ने नियमित नवीन नियुक्ति योजना-2026 के तहत इसके आदेश भी जारी कर दिए हैं।
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इस योजना के तहत पावर मैनेजमेंट कंपनी, तीनों बिजली वितरण कंपनियों और एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी में कार्यरत लाइन अटेंडेंट, टेस्टिंग अटेंडेंट, जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर जैसे पदों पर काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को नियमित होने का मौका मिलेगा।
हालांकि इसके लिए कम से कम दो साल की संविदा सेवा पूरी होना जरूरी है। कर्मचारियों को ऑनलाइन विभागीय परीक्षा देनी होगी। परीक्षा के अंकों और सेवा अवधि के आधार पर मेरिट तैयार होगी। सेवा अनुभव के लिए 30 बोनस अंक भी दिए जाएंगे। (Contract Employee Regularization in Madhya Pradesh) वहीं सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत और एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग के कर्मचारियों को 40 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। सरकार का लक्ष्य अक्टूबर तक पूरी चयन प्रक्रिया पूरी करने का है।
ऊर्जा विभाग के इस फैसले के बाद अब प्रदेश के दूसरे विभागों में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। संविदा कर्मचारी महासंघ ने सरकार से मांग की है कि बिजली विभाग की तर्ज पर राज्य के सभी 54 विभागों में भी यही व्यवस्था लागू की जाए।
इस मुद्दे पर सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को सभी विभागों के संविदा कर्मचारियों का एक साथ नियमितीकरण करना चाहिए। वहीं भाजपा का कहना है कि सरकार चरणबद्ध तरीके से सभी विभागों में यह प्रक्रिया लागू करेगी और हर कर्मचारी के हितों का ध्यान रखा जाएगा।’
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गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में करीब 1.83 लाख संविदा, स्थायी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी काम कर रहे हैं। ये कर्मचारी लंबे समय से समान काम के बदले समान वेतन और नियमितीकरण की मांग करते आ रहे हैं। (Contract Employee Regularization in Madhya Pradesh) ऐसे में ऊर्जा विभाग का यह फैसला उनके लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार दूसरे विभागों के लिए क्या फैसला लेती है।
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