MP Congress
ये देखकर अंदाजा लगाना आसान है कि कांग्रेस में फिलहाल सब कुछ ऑल इज़ वेल नहीं है। दरअसल, हार के चुनावों की समीक्षा के दौरान महिला कांग्रेस की बैठक में अलका लांबा की मौजूदगी में ही जूतमपैजार की नौबत आ गयी तो दूसरी तरफ कांग्रेस नेता खुलकर जीतू पटवारी की खिलाफत में उतर आए हैं। ये कहा जा रहा है कि जीतू पटवारी की लीडरशिप में कांग्रेस खत्म हो जाएगी। ये शायद इसलिए भी क्योंकि जीतू पटवारी को कांग्रेस का कप्तान बने तकरीबन 6 महीने हो चुके हैं और जीतू पटवारी अब तक अपनी टीम नहीं बना पाए हैं। जाहिर है अब कांग्रेस नेताओं कार्यकर्ताओं का गुस्सा दिखने भी लगा है।
कांग्रेस ये ज़रुर कह रही है कि जीतू पटवारी की लीडरशिप में सब ठीक है क्योंकि जीतू पटवारी अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहे हैं। जाहिर है जीतू पटवारी को कांग्रेस की कमान संभाले आधा साल बीत चुका है। जीतू की कप्तानी में खेलने को टीम तैयार है लेकिन दिल्ली से टीम को मंजूरी नहीं मिल रही है। ये भी तय है कि जीतू की टीम को पार्टी के भीतर के ही विरोधी आसानी से हजम भी नहीं करेंगे। शायद इसलिए दिल्ली आलाकमान नाराज़ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों के गुस्से के शांत होने का इंतजार कर रहा है। खबर तो ये भी है कि हार के कारणों की जांच के लिए बनी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को जीतू पटवारी के खिलाफ ढेरों शिकायतें मिली हैं।
कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि जीतू पटवारी पर आलाकमान की तलवार लटकी है, जिसकी धार अमरवाड़ा चुनाव में मिली हार के बाद और भी तेज़ हो गयी है। उधर कांग्रेस की कलह पर बीजेपी चुटकी ले रही है। कांग्रेस में फिलहाल पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और प्रभारी जितेंद्र सिंह पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट रहा है। दबी जुबान में पटवारी के विरोधी कह रहे हैं कि जीतू को जितेंद्र सिंह बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने के बाद युवा कार्यकर्ताओं में गजब का जोश नजर आ रहा है।
नर्सिंग घोटाले से लेकर नीट घोटाले में कांग्रेस सड़क पर दमदारी के साथ बीजेपी सरकार की खिलाफत भी करती दिख रही है। खैर, कांग्रेस को बीजेपी के मुकाबले खड़े होने के लिए गुटबाजी से ना सिर्फ पार पाना होगा बल्कि गांव-गांव तक अपना कैडर बनाना होगा।