NSUI Presidents Show Cause Notice || Image- Pinterest File
भोपाल। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में अब अनुशासनात्मक कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। (NSUI Presidents Show Cause Notice) प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एनएसयूआई के 22 जिलाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इन पदाधिकारियों ने पार्टी के निर्देश के बावजूद विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित नहीं किया।
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दरअसल, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जांच के दौरान निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद भाजपा उम्मीदवार महेश केंवट निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हो गए। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। कांग्रेस का आरोप था कि चुनाव आयोग के फैसले से भाजपा को अनुचित लाभ मिला है। पार्टी नेताओं ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” और “सीट चोरी” तक करार दिया। मामले को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।
नामांकन निरस्त होने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का फैसला लिया था। (NSUI Presidents Show Cause Notice) पार्टी के सभी आनुषंगिक संगठनों को जिला स्तर पर भाजपा और चुनाव आयोग के फैसले के विरोध में पुतला दहन एवं प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि पार्टी को मिली रिपोर्ट के अनुसार एनएसयूआई के करीब 22 जिलाध्यक्षों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।
इसी को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर संबंधित जिलाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 16 जून 2026 को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की अधिकृत उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में जिला स्तर पर पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। (NSUI Presidents Show Cause Notice) इसकी सूचना एसएमएस, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भी संबंधित पदाधिकारियों तक पहुंचाई गई थी।
पत्र में कहा गया है कि पर्याप्त जानकारी होने के बावजूद कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया, जिससे संगठन के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता परिलक्षित होती है। प्रदेश नेतृत्व ने इस पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। नोटिस में संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पत्र प्राप्ति के तीन दिन के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रदेश कार्यालय को भेजें।
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