ब्रिक्स घोषणापत्र जारी, किसानों के अधिकारों की सुरक्षा और डिजिटल कृषि के लिए नये मंच बनेंगे

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ब्रिक्स घोषणापत्र जारी, किसानों के अधिकारों की सुरक्षा और डिजिटल कृषि के लिए नये मंच बनेंगे

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  • Publish Date - June 13, 2026 / 06:16 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 06:16 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

इंदौर (मध्यप्रदेश), 13 जून (भाषा) भारत की अध्यक्षता में यहां आयोजित ब्रिक्स बैठक का समापन शनिवार को ‘इंदौर घोषणा-पत्र’ के साथ हुआ जिसमें इस अंतर-सरकारी संगठन ने खाद्य सुरक्षा, किसानों के अधिकारों, जलवायु-लचीली खेती, डिजिटल कृषि और कृषि व्यापार को मजबूत करने के लिए कई संयुक्त घोषणाएं कीं।

अधिकारियों ने बताया कि इन घोषणाओं में बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए वैश्विक मंच की स्थापना, डिजिटल कृषि नेटवर्क और कृषि-पर्यावरणीय एवं पुनर्योजी खेती के लिए उत्कृष्टता केंद्रों के नेटवर्क के गठन जैसे फैसले शामिल हैं।

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच दिवसीय बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि ब्रिक्स देशों ने कृषि सहयोग बढ़ाने के लिए कई नयी संस्थागत पहलों पर सहमति जताई है जिनमें से कई पहलों का समन्वय भारत करेगा।

चौहान ने बताया कि सदस्य देशों ने बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए ‘‘ग्लोबल फोरम ऑन फार्मर्स राइट्स इन सीड सिस्टम्स’’ स्थापित करने पर सहमति जताई है।

उन्होंने कहा कि यह मंच किसानों के बीज संबंधी अधिकारों, देशी बीजों की विविधता और पारंपरिक कृषि ज्ञान के संरक्षण को बढ़ावा देगा तथा इसका समन्वय भारत करेगा।

चौहान ने बताया कि कृषि आदानों, आनुवंशिक संसाधनों और सूचना साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए ‘‘ब्रिक्स एग्रीन (एग्रो-इनपुट्स, जेनेटिक रिसोर्सेज एंड इंफॉर्मेशन नेटवर्क)’’ के गठन का भी निर्णय लिया गया है।

उनके अनुसार इस नेटवर्क के जरिये सदस्य देशों के बीच कृषि संसाधनों, तकनीकी जानकारी और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा तथा इसका समन्वय भी भारत करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सदस्य देशों ने ‘‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’’ संबंधी पहल को आगे बढ़ाने और इसके परिचालन तंत्र पर चर्चा जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि यह पहल खाद्यान्न व्यापार, बाजार संपर्क और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

चौहान ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए ‘एग्रोइकोलॉजी’ और पुनर्योजी कृषि के क्षेत्र में ‘‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रो-इकोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर’’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि इस पहल का प्रारंभिक समन्वय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधीन भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम करेगा।

उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (आईओटी), भू-स्थानिक तकनीकों और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना आधारित कृषि समाधानों को बढ़ावा देने के लिए ‘‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर’’ बनाने पर भी सहमति बनी है।

उन्होंने कहा कि इसका प्रारंभिक समन्वय भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली करेगा।

चौहान ने कहा कि ब्रिक्स के सदस्य देशों ने पहले से स्थापित ‘ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म’ को और मजबूत करके ‘‘नॉलेज टू एक्शन हब’’ के रूप में विकसित करने पर भी सहमति जताई है ताकि कृषि अनुसंधान के परिणाम तेजी से किसानों तक पहुंच सकें और नवाचार प्रयोगशालाओं से निकलकर खेतों में फलीभूत हो सकें।

उन्होंने बताया कि ‘इंदौर घोषणा-पत्र’ में खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने, छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका सुधारने, कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने तथा कृषि व्यापार एवं निवेश सहयोग को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता दर्ज की गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सदस्य देशों ने ‘निष्पक्ष, समावेशी और पारदर्शी’ बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है तथा कृषि व्यापार को सुगम बनाने के उपायों पर भी चर्चा की है।

चौहान ने कहा कि ब्रिक्स की नयी पहलों का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाना, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना और खेती को अधिक टिकाऊ एवं जलवायु-लचीला बनाना है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के सबसे स्वच्छ शहर में पांच दिन तक चलीं कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों में सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों समेत करीब 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उन्होंने कहा कि बैठक में खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार, जलवायु परिवर्तन, पुनर्योजी खेती और कृषि नवाचार जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

चौहान ने रेखांकित किया कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, इनके पास वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व खाद्यान्न उत्पादन में भी इनका लगभग 42 प्रतिशत योगदान है।

उन्होंने कहा कि ऐसे में कृषि क्षेत्र में इन देशों के बीच सहयोग बढ़ना वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं।

भाषा हर्ष

राजकुमार

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