भोपाल, आठ जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत और नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े सालों पुराने भुगतान विवाद को लेकर हुए समझौते पर सहमति जताने के लिए बुधवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उन्होंने ‘गुजरात लॉबी’ के सामने मध्यप्रदेश के हितों से समझौता किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जिस मध्यप्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना के लिए अपनी जमीन दी, अपने जंगल दिए, अपने गांव डुबोए और लाखों लोगों का विस्थापन झेला, उसी मध्यप्रदेश की सरकार ने गुजरात सरकार से 7,669 करोड़ रुपये का मुआवज़ा मांगा था।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘लेकिन मोहन यादव जी ने प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय गुजरात सरकार से समझौता कर लिया और अब उल्टा 550 करोड़ रुपये गुजरात को देने पर सहमति जता दी।’
नर्मदा अवार्ड के लाभार्थी राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं और इन राज्यों के बीच सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण की लागत साझा के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समझौता लेकर समझौता हुआ है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की पहल पर मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें लंबित धनराशि के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक सरदार सरोवर बांध परियोजना के मुआवजे के तौर पर मध्यप्रदेश ने 7669 करोड़ रुपये की मांग की थी लेकिन मंगलवार को हुए समझौते के बाद मध्यप्रदेश की सरकार को गुजरात सरकार को 550 करोड़ रुपये देने होंगे।
पटवारी ने कहा कि मां नर्मदा का उद्गम मध्यप्रदेश में है और इसका अधिकांश प्रवाह भी यहीं है फिर भी प्रदेश के अनेक हिस्से आज भी सिंचाई और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, गांवों तक नहरें नहीं पहुंचतीं, लेकिन मध्यप्रदेश के हिस्से का पानी और उसके संसाधनों का लाभ कहीं और पहुंच जाता है।
उन्होंने कहा, ‘पूरा प्रदेश देख रहा है कि किस तरह आज मोहन सरकार ने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के सामने मध्य प्रदेश के हितों से समझौता कर लिया।’
उन्होंने कहा, ‘मोहन यादव जी आज गुजरात लॉबी के सामने दंडवत प्रणाम करते हुए नतमस्तक हैं।’
केंद्रीय गृह मंत्री ने मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हुए इस समझौते पर कहा कि किसी भी विवाद से होने वाले राष्ट्रीय नुकसान को ध्यान में रख कर उसे सुलझाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि पड़ोसी राज्य समृद्ध होता है, तो उसका लाभ अपने राज्य को भी मिलता है।
भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब
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