भोपालः मध्यप्रदेश में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता के बयान से सियासी घमासान छिड़ गया। मौलाना सज्जाद नोमानी ने एक बैठक के दौरान हिंदुओं को लेकर कुछ ऐसा कहा जिसके बाद बीजेपी भड़क उठी
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी मुस्लिमों को संबोधित करते हुए इस कदर बौराए कि हिंदुओं को बांटने वाला जहरीला बयान दे दिया। मौलाना ने नई परिभाषा गढ़ते हुए कहा कि सिख, ट्राइबल, दलित, लिंगायत और तमिलनाडु के लोग हिंदू नहीं हैं। मौलाना का ये बयान आते ही देश समेत मध्यप्रदेश में भी सियासी पारा चढ़ गया। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि हिन्दू सतर्क और सावधान हो जाओ, धर्म और जाति से ऊपर उठकर हिंदू और हिंदुस्तान की रक्षा के लिए एकजुट हो जाओ। मौलानाओं को बता दो कि न तो हिंदू अल्पसंख्यक होगा न मुसलमान को इस देश पर राज करने दिया जाएगा।
इधर कांग्रेस जानती है ऐसे मसले में किसी एक पक्ष के साथ खड़े होना बर्र के छत्ते में हाथ डालने जैसा होगा, लिहाज़ा उसने मौलाना को भाजपा का ही एजेंट बता दिया और कहा कि मौलाना सज्जाद नोमानी जैसे लोग भाजपा की सुपारी लेकर वही कर रहे हैं जो कभी जिन्ना और सावरकर करते थे। लेकिन सवाल ये कि मौलाना के इस बयान के पीछे की असल सियासत क्या है? मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड क्या UCC के काउंटर के तौर पर ऐसे सोचे समझे बयान दे रहा है? सवाल ये कि क्या ऐसे बयान समाज को बांटने का काम नहीं करते हैं। सवाल ये भी कि कांग्रेस ऐसे बयानों कि स्पष्ट निंदा करने के बजाय इसे भाजपा की ही चाल के तौर पर क्यूँ देखने लगती है? सवाल ये कि क्या मौलाना के इस बयान का कोई सिरा राहुल गांधी की जातिगत जनगणना की राजनीति से कहीं जाकर मिलता है?