भोपालः Employees Strike मध्य प्रदेश में त्योहारों से पहले सरकारी कर्मचारियों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश का सबसे बड़ा कर्मचारी संगठन तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ सड़कों पर उतर आया। कर्मचारियों ने आठ महीने से लंबित महंगाई भत्ता और महंगाई राहत समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने नए कर्मियों को प्रोबेशन से ही 100% वेतन देने और 3 साल तक 70% से 90% वेतन का नियम खत्म करने की मांग की। इसके साथ ही अनुकंपा नियुक्ति और चतुर्थ से तृतीय श्रेणी में पदोन्नति के लिए CPCT की बाध्यता खत्म करने, कर्मचारियों को ई-अटेंडेंस से मुक्ति और कैशलेस इलाज की सुविधा देने की मांग भी की।
Employees Strike कर्मचारियों के आंदोलन पर सियासत भी गरमा रही है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार के पास कोई विजन नहीं है इसलिए कर्मचारियों को हड़ताल करनी पड़ी। इस पर बीजेपी ने पलटवार किया कि कांग्रेस केवल आरोप और आलोचना करने वाली पार्टी है। त्योहारों से पहले कर्मचारियों का ये आंदोलन किसी चुनौती से कम नहीं। सवाल ये है कि कर्मचारियों की मांगें कितनी जायज हैं और सरकार उस पर क्या एक्शन लेगी? सवाल ये भी है कि क्या कर्मचारियों के मुद्दे पर कांग्रेस राजनीति कर रही है?