गुना: Guna Panchayat Scam: गुना जिले की करोद ग्राम पंचायत से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जिसने प्रशासन से लेकर आम जनता तक को सकते में डाल दिया है। यहां की महिला सरपंच लक्ष्मीबाई ने अपने निजी कर्ज की भरपाई के लिए पूरे पंचायत संचालन को ही ठेके पर दे दिया।
Guna Panchayat Scam: जानकारी के अनुसार सरपंच लक्ष्मीबाई के पति ने पंचायत चुनाव और कुछ निजी कार्यों के लिए लगभग 20 लाख रुपये का कर्ज लिया था। कर्ज चुकाने के दबाव में लक्ष्मीबाई ने पंचायत के ही दबंग पंच रणवीर कुशवाह को पंचायत संचालन का ठेका सौंप दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे सौदे के लिए बाकायदा एक लिखित अनुबंध भी तैयार किया गया जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि पंचायत के राजस्व और अन्य स्रोतों से होने वाली आमदनी का 5 प्रतिशत हिस्सा सरपंच को कमीशन के रूप में मिलेगा।
Guna Panchayat Scam: यह मामला तब उजागर हुआ जब ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत की गई और मामला गुना जिला प्रशासन के संज्ञान में आया। कलेक्टर किशोर कन्याल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में अनुचित और अवैध प्रक्रिया की पुष्टि हुई जिसके बाद केंट थाना पुलिस ने पंच रणवीर कुशवाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साथ ही महिला सरपंच लक्ष्मीबाई को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
गुना जिले की करोद पंचायत की महिला सरपंच लक्ष्मीबाई ने अपने निजी कर्ज चुकाने के लिए पंचायत संचालन का ठेका एक पंच को दे दिया था, जिसकी लिखित अनुबंध भी तैयार की गई थी।
"गुना सरपंच पंचायत ठेका" देने की वजह क्या थी?
सरपंच लक्ष्मीबाई और उनके पति ने चुनाव और निजी खर्चों के लिए लगभग ₹20 लाख का कर्ज लिया था, जिसे चुकाने के लिए उन्होंने पंचायत संचालन को ठेके पर दिया।
क्या "गुना पंचायत ठेका मामला" में कोई कानूनी कार्रवाई हुई है?
हाँ, जिला प्रशासन द्वारा जांच के बाद पंच रणवीर कुशवाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और महिला सरपंच को पद से हटा दिया गया है।
क्या "गुना सरपंच मामला" में ठेका देने की लिखित डील हुई थी?
जी हाँ, एक लिखित अनुबंध तैयार किया गया था, जिसमें पंचायत की आय का 5% हिस्सा सरपंच को कमीशन के रूप में देने का उल्लेख था।
"गुना महिला सरपंच ठेका मामला" की वर्तमान स्थिति क्या है?
मामले की जांच जारी है, सरपंच पद से हटा दी गई हैं और आरोपी पंच के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जा रही है। जिला प्रशासन ने पंचायत संचालन को दोबारा अपने नियंत्रण में ले लिया है।