Gwalior High Court Case: फरार आरोपी ने पत्नी संग मिलकर रची थी से झूठी कहानी, सच सामने आते ही कोर्ट ने लगाईं फटकार, इतने हजार का जुर्माना भी लगाया

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Gwalior High Court Case: फरार आरोपी ने पत्नी संग मिलकर रची थी से झूठी कहानी, सच सामने आते ही कोर्ट ने लगाईं फटकार, इतने हजार का जुर्माना भी लगाया

  • Reported By: Nasir Gouri

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  • Publish Date - May 19, 2026 / 03:58 PM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 04:11 PM IST

Gwalior High Court Case/Image Credit: IBC24 File

HIGHLIGHTS
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने झूठी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
  • कोर्ट ने कहा कि पुलिस पर गलत आरोप लगाकर न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया
  • सुनवाई के दौरान CCTV और अन्य आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया

Gwalior High Court Case: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के दुरुपयोग के मामले में दतिया के याचिकाकर्ता शैलेंद्र सिंह पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि कानून का दुरुपयोग कर पुलिस पर झूठे आरोप लगाना न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। इस तरह के मामलों से पुलिस की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। शैलेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि ग्वालियर के महाराजपुरा थाना पुलिस ने उसकी बहन, उसके दो साल के बेटे और तीन अन्य परिजनों को अवैध रूप से हिरासत में रखा है। कोर्ट ने मामले में पुलिस से जवाब मांगा था।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने केस डायरी पेश कर बताया कि संबंधित महिला अपने घर पर सुरक्षित है और पुलिस हिरासत में नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता पक्ष ने महिला को कोर्ट (Gwalior High Court Case) में पेश किया। महिला ने कोर्ट को बताया कि उसका पति हत्या के मामले में फरार है। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने 10 मई को उसे अज्ञात स्थान पर बंधक बनाया और छोड़ने के लिए एक लाख रुपए मांगे। उसने यह भी कहा कि 11 मई को पुलिस ने दोबारा उसे उठाया और रिश्तेदार श्यामू गुर्जर की पिटाई की। जिसके बाद, जस्टिस जीएस अहलुवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने महिला से पूछताछ की। महिला उस स्थान का नाम नहीं बता सकी जहां कथित तौर पर उसे रखा गया था।

50 हजार का लगाया जुर्माना 

कोर्ट (Gwalior High Court Case)  ने पाया कि एक लाख रुपए मांगने का आरोप मूल याचिका में दर्ज नहीं था। याचिका में दावा किया गया था कि पुलिस द्वारा जबरन ले जाने की घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड है। सुनवाई के दौरान ऐसा कोई वीडियो साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं किया गया। सुनवाई में सामने आया कि 12 मई को ही याचिकाकर्ता को पता चल गया था कि उसकी बहन घर लौट आई है। इसके बावजूद कोर्ट को इसकी जानकारी नहीं दी गई और सुनवाई जारी रखी गई। खंडपीठ ने कहा कि फरार हत्या आरोपी को बचाने के लिए पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग बताया और कहा कि ऐसे प्रयासों को पूरी सख्ती से रोका जाना जरूरी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।

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हाईकोर्ट ने किस पर जुर्माना लगाया?

दतिया निवासी शैलेंद्र सिंह पर झूठी याचिका दायर करने के मामले में 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए थे?

याचिका में आरोप लगाया गया था कि ग्वालियर पुलिस ने महिला और उसके परिजनों को अवैध हिरासत में रखा था।

कोर्ट में क्या सच्चाई सामने आई?

सुनवाई में पता चला कि महिला अपने घर पर सुरक्षित थी और पुलिस हिरासत में नहीं थी।

कोर्ट ने याचिका को लेकर क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया और कानून का गंभीर दुरुपयोग है।

क्या कोर्ट में कोई CCTV सबूत पेश किया गया?

नहीं, याचिका में CCTV रिकॉर्डिंग का दावा किया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान कोई वीडियो साक्ष्य पेश नहीं किया गया।