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Dhirendra Shastri Latest News: ग्वालियर: मध्यप्रदेश के ग्वालियर से बड़ी खबर आ रही है। जहां, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, ग्वालियरल जिले के डबरा में नवग्रह शक्तिपीठ महोत्सव के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने युवतियों को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने व्यास पीठ से संबोधित करते हुए कहा, “तुम दुर्गा बनो, काली बनो, कभी बुर्के वाली मत बनो।” चलिए विस्तार से आपको पूरा मामला बताते हैं।
दरअसल, डबरा में नवग्रह शक्तिपीठ महोत्सव के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने युवतियों को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने व्यास पीठ से संबोधित करते हुए कहा, “तुम दुर्गा बनो, काली बनो, कभी बुर्के वाली मत बनो।” 18 से 25 साल की उम्र को जीवन में सबसे अहम बताते हुए शास्त्री ने कहा कि जो इस उम्र में सुधर जाता है, वह कभी नहीं बिगड़ेगा। उन्होंने युवाओं को अनुशासन और सही मार्ग पर चलने की अपील की।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में पौराणिक उदाहरणों का हवाला देते हुए विभीषण और मंथरा का उल्लेख किया। नवग्रह पीठ के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन भी कथा का असर दिखा, जिसमें भक्तों का उमड़ा जनसैलाब देखना गया। शास्त्री की सरल और प्रभावशाली व्याख्या ने दर्शनार्थियों और युवा श्रोताओं को गहरी चेतना और आध्यात्मिक प्रेरणा दी।
उत्तरप्रदेश के बांदा में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू समाज और हिंदू राष्ट्र को लेकर बड़ा और चर्चा में आने वाला बयान दिया था। उन्होंने कहा कि केवल मुसलमानों को गाली देने से भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हिंदुओं को पहले अपनी कुरीतियों और बुराइयों को सुधारना होगा, तभी देश हिंदू राष्ट्र बन पाएगा। उनके इस बयान ने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा, “हिंदू एक बात नोट कर लें, मुसलमानों को गाली देकर भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हिंदुओं को अपनी कुरीतियां सुधारनी पड़ेंगी। जब तक हम खुद नहीं सुधरेंगे, तब तक कुछ नहीं बदलेगा।” उन्होंने आगे कहा कि समाज में फैली बुराइयों को खत्म करना ही सबसे बड़ी जरूरत है।
उन्होंने मुस्लिम समाज पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “उनके यहां तो कटना ही कटना है। जहां देखो, वहां कटना है। भगवान ही बचाए, हमें कुछ बोलना नहीं है, नहीं तो दंगा हो जाए।” इसके साथ ही उन्होंने तलाक की प्रक्रिया को लेकर भी तुलना की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में तीन बार “हु… हु… हु…” कहने पर तलाक हो जाता है, जबकि हिंदू समाज में तलाक के लिए 20 से 25 बार कोर्ट में पेशी देनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें कोई बुराई नहीं है, हर समाज का अपना तरीका होता है। “उनका अपना-अपना है। कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे,” उन्होंने कहा।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी समाज को नीचा दिखाना नहीं है, बल्कि हिंदू समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि अगर हिंदू समाज संगठित होकर अपनी कमजोरियों को दूर करे, तो कोई भी ताकत देश को कमजोर नहीं कर सकती।