bus suspension/ image source: IBC24
ग्वालियर: मध्यप्रदेश के ग्वालियर में यात्री सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए आरटीओ ने 15 साल पुरानी कुल 59 बसों के परमिट दो माह के लिए सस्पेंड कर दिए हैं। यह निर्णय उन बसों के लिए लिया गया है जो ग्वालियर संभाग के चार जिलों, ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी और नरसिंहपुर में यात्रियों को सेवा प्रदान कर रही थीं।
Bus Permit Suspenion को लेकर सूत्रों के बताया कि, इन 59 बसों में से अधिकांश 44 रूटों पर चलती थीं, जो कि दैनिक यात्री आवागमन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। लेकिन लंबे समय से बसों की स्थिति खराब और उम्र अधिक होने के कारण आरटीओ ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया।
Bus Permit Suspenion के मामले में आरटीओ अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में बसों की नियमित निरीक्षण रिपोर्ट में कई खामियां पाई गई थीं। इनमें ब्रेक फेल होना, इंजन की खराबी, सीटों का क्षतिग्रस्त होना और सुरक्षा उपकरणों की अनुपस्थिति शामिल हैं। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और पुराने वाहनों से संभावित दुर्घटनाओं का जोखिम अधिक रहता है।
आरटीओ ने स्पष्ट किया कि यह दो माह का सस्पेंशन अस्थायी है और बस मालिकों को आवश्यक मरम्मत, फिटनेस और सुरक्षा जांच पूरी करने के बाद ही परमिट बहाल किया जाएगा।
Bus Permit Suspenion का यह कदम यात्रियों के लिए थोड़ी असुविधा पैदा कर सकता है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक चलती बसों में यात्रा करना खतरे से खाली नहीं होता। सस्पेंड की गई बसों की जगह अन्य प्रमाणिक और फिट बसें उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि यात्री अपने दैनिक आवागमन में परेशानी न महसूस करें।
यात्री संघों ने आरटीओ के इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा कि लंबे समय से चलती इन बसों की हालत चिंताजनक थी। उनके अनुसार, यह कदम भविष्य में किसी भी संभावित हादसे से बचाव करने में मदद करेगा।
Bus Permit Suspenion के मामले में बस मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी वाहनों की सभी तकनीकी और सुरक्षा जांच कराएं। मरम्मत और फिटनेस प्रमाण पत्र के साथ ही परमिट को दो माह बाद बहाल किया जाएगा। आरटीओ लगातार इन बसों की निगरानी करेगा और केवल उन्हीं वाहनों को रूट पर चलने की अनुमति दी जाएगी जो सभी सुरक्षा मानकों पर खरे उतरें।