Home » Madhya Pradesh » After Vyapam, Another Shock, 16 Lakh MBBS Degree Scam Rocks Gwalior
Gwalior Medical College Scam : पैसे दो और डॉक्टर बनो! एक दिन भी नहीं आया कॉलेज.. उसे दे दी MBBS की डिग्री, इन कॉलेजों के कारनामे से दिल्ली तक मचा हड़कंप
Ads
ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में 16 लाख रुपये लेकर बर्खास्त छात्रों को MBBS डिग्रियां देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ऑडियो वायरल होने के बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटी की मिलीभगत पर सवाल उठ रहे हैं और जांच शुरू हो गई है।
ग्वालियर :Gwalior Medical College Scam व्यापमं घोटाले की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक और बड़ा धमाका हुआ है। गजराराजा मेडिकल कॉलेज यानी GRMC में पैसे दो और एमबीबीएस की डिग्री लो का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि जिन छात्रों को साल 2006-10 के बीच व्यापमं कांड में बर्खास्त कर दिया गया था, उन्हें 16-16 लाख रुपये लेकर चुपचाप जीवाजी यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज के सिंडिकेट ने डिग्रियां बांट दी हैं। बिना बहाली, बिना अटेंडेंस और बिना परीक्षा के डॉक्टर बनाने का यह जुगाड़ अब पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्वालियर के प्रतिष्ठित गजराराजा मेडिकल कॉलेज की साख पर एक बार फिर बट्टा लगा है। इस बार मामला सीधे-सीधे डिग्रियों की सेल का है। शिकायतकर्ता और व्यापमं के पूर्व छात्र संदीप लहारिया ने एक ऑडियो वायरल कर इस काले खेल का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि यूजी शाखा प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुछ अधिकारियों ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया। इस सिंडिकेट ने उन छात्रों को गुपचुप तरीके से डिग्रियां थमा दीं, जिन्हें 2017 में व्यापमं जांच के बाद बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन
आपको बता दें कि एक्टिविस्ट का दावा है कि उसके पास पुख्ता सबूत और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स हैं कि कैसे कॉलेज प्रबंधन और यूनिवर्सिटी की मिलीभगत से बर्खास्त छात्रों को डिग्रियां दी जा रही हैं। 16 लाख रुपये में भविष्य के डॉक्टरों का सौदा हो रहा है, जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य व्यवस्था से खिलवाड़ है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरएमसी के डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए यूजी शाखा प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी को पद से हटा दिया है। साथ ही, डॉ. प्रमोद कुमार छाबनिया की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बना दी गई है, जो अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी के पुराने रिकॉर्ड्स खंगाल रही है। वहीं जीवाजी यूनिवर्सिटी के अधिकारी-कर्मचारी भी इसकी जद में आए हुए हैं। उन्होंने भी एक जांच दल बनाया हुआ है जो जांच कर रहा है।
क्या हुआ था, गजराराजा मेडिकल कॉलेज में
दरअसल व्यापमं कांड के बाद 2006-10 बैच के 35 से अधिक छात्रों की जांच हुई थी। इनमें से 30 से ज्यादा को 2017 में बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बावजूद कुछ छात्रों को डिग्री जारी होने के आरोप लगे हैं। Jiwaji University Degree Fraud शिकायतकर्ता ने राज्यपाल, कुलगुरु, उच्च शिक्षा विभाग और CBI तक शिकायत भेजी है। गजराराजा मेडिकल कॉलेज और जीवाजी यूनिवर्सिटी ने जांच कमेटी गठित कर दी है।
बहरहाल संदीप लहारिया को आरटीआई में जानकारी मांगने पर जीवाजी यूनिवर्सिटी की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिससे संदेह और गहरा गया है। हालांकि शुरुआती दौर में मेडिकल कॉलेज के एक कर्मचारी पर कार्रवाई कर दी गई है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज का मामला है, या इसके तार और भी गहरे जुड़े हैं? क्या मध्य प्रदेश में अयोग्य लोगों को डॉक्टर बनाने का यह कारखाना अब भी चालू है?