Gwalior Tree Transplantation Scam High Court : विकास के नाम पर करोड़ों खर्च… फिर भी नहीं बच पाए 100 साल पुराने पेड़! अब हाईकोर्ट ने उठाया बड़ा कदम

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ग्वालियर में 1.51 करोड़ रुपये खर्च कर ट्रांसप्लांट किए गए 339 पेड़ों के सूखने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आम जनता से पेड़ों की मौजूदा स्थिति के सबूत मांगे हैं।

  • Reported By: Nasir Gouri

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  • Publish Date - June 27, 2026 / 08:30 PM IST,
    Updated On - June 27, 2026 / 08:37 PM IST

Gwalior Tree Transplantation Scam High Court / Image Source : AI

HIGHLIGHTS
  • 1.51 करोड़ रुपये खर्च कर 339 पेड़ों का ट्रांसप्लांट किया गया।
  • अधिकांश पेड़ सूखकर ठूंठ बन गए।
  • हाईकोर्ट ने जनता से पेड़ों की स्थिति के सबूत मांगे।

ग्वालियर : Gwalior Tree Transplantation Scam High Courtमध्य प्रदेश के ग्वालियर में विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांट का मामला अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने साफ कहा है कि यह मामला शहर के हर नागरिक के अधिकारों से जुड़ा है। कोर्ट ने आम जनता से अपील की है कि वे पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांट के बाद उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराएं। कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, जिन 339 पेड़ों का ट्रांसप्लांट किया गया था, उनमें से अधिकांश अब सूखकर ठूंठ बन चुके हैं।

ग्राउंड जीरो की हकीकत

यह ग्वालियर का सिरोल पहाड़ी क्षेत्र है, जहां 1.51 करोड़ रुपये खर्च कर 339 पेड़ों का ट्रांसप्लांट किया गया था। दावा किया गया था कि पुराने पेड़ों को नई जगह पर नई जिंदगी मिलेगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ज्यादातर पेड़ सूख चुके हैं और केवल ठूंठ नजर आ रहे हैं। निर्माण एजेंसी मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड हाईकोर्ट में यह तक नहीं बता सकी कि आखिर कितने पेड़ अब भी जीवित हैं। IBC24 की ग्राउंड रिपोर्ट में भी सामने आया है कि करीब 100 साल पुराने पेड़ों को बचाने का दावा पूरी तरह विफल साबित हुआ।

क्या है थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना?

Thatipur Re-densification Project MP Housing Board ग्वालियर की थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत पुराने बैरक क्वार्टरों को तोड़कर आधुनिक टाउनशिप विकसित की जानी है। योजना के तहत
30.06 हेक्टेयर क्षेत्र में आवासीय सेक्टर विकसित होगा।19 हेक्टेयर भूमि पर 798 नए सरकारी आवास बनाए जाएंगे।8 हेक्टेयर क्षेत्र व्यावसायिक गतिविधियों के लिए रहेगा।3.06 हेक्टेयर क्षेत्र खुला रखा जाएगा।इस पूरे क्षेत्र में करीब 700 पेड़ थे। इनमें से 407 पेड़ निर्माण क्षेत्र में थे। इनमें 329 पेड़ों को सिरोल पहाड़ी पर ट्रांसप्लांट किया गया, जबकि 78 पेड़ काट दिए गए।

1.51 करोड़ का ट्रांसप्लांट, फिर भी सूख गए पेड़

इन पेड़ों के बदले 800 नए पौधे कैंसर पहाड़ी क्षेत्र में लगाने की योजना बनाई गई। इसके लिए दिल्ली की एक निजी कंपनी को 1.51 करोड़ रुपये का ठेका देकर 339 पेड़ों का ट्रांसप्लांट कराया गया था। लेकिन अब इनमें से अधिकांश पेड़ सूख चुके हैं।

हाईकोर्ट की सख्ती

Gwalior News Court Warning पेड़ ट्रांसप्लांट का मामला अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह हर नागरिक के अधिकारों से जुड़ा विषय है। कोर्ट ने लोगों से अपील की है कि थाटीपुर योजना के तहत काटे गए और ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों की मौजूदा स्थिति की जानकारी और सबूत उपलब्ध कराएं। नागरिक डाक के माध्यम से भी अपने साक्ष्य कोर्ट तक भेज सकते हैं।हाईकोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड ने मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए हैं, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

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मामला किस शहर का है?

मध्य प्रदेश के ग्वालियर का।

. कितने पेड़ों का ट्रांसप्लांट किया गया था?

339 पेड़ों का ट्रांसप्लांट कराया गया था।