इंदौर, 29 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के 60 मेगावॉट के सौर ऊर्जा संयंत्र का बुधवार को उद्घाटन किया और कहा कि देश में हरित बॉन्ड के बूते तैयार अपनी तरह की पहली नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना अन्य शहरी निकायों को भी प्रेरित करेगी।
मुख्यमंत्री ने खरगोन जिले में करीब 211 एकड़ में फैली इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत की। परियोजना के लिए मुख्य रूप से बंजर भूमि का उपयोग किया गया है।
यादव ने उद्घाटन समारोह में कहा, ‘‘एक ओर इस परियोजना से आईएमसी के बिजली के बिल में बड़ी कटौती होगी, तो दूसरी ओर कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इससे पर्यावरण को फायदा होगा।’’
उन्होंने कहा कि यह अनूठी परियोजना देश के अन्य शहरी निकायों को भी प्रेरित करेगी।
अधिकारियों ने बताया कि 271.16 करोड़ रुपये की लागत वाली सौर ऊर्जा परियोजना के लिए आईएमसी ने सार्वजनिक निर्गम (पब्लिक इश्यू) के रूप में जारी हरित बॉन्ड के जरिये 244 करोड़ रुपये की रकम जुटाई है और यह जन भागीदारी मॉडल के वित्तपोषण से बनी देश की पहली नवीकरणीय ऊर्जा इकाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘इस परियोजना में निवेश के लिए देश के 28 राज्यों के लोगों ने दिलचस्पी दिखाई। यह परियोजना जन भागीदारी का बड़ा उदाहरण है।’
उन्होंने कहा कि 20 साल की अवधि वाली सौर ऊर्जा परियोजना के संचालन से आईएमसी को कार्बन क्रेडिट के जरिये 18 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय होगी।
अधिकारियों ने बताया कि नर्मदा नदी के पानी को खरगोन जिले के जलूद से 80 किलोमीटर दूर इंदौर लाकर घर-घर पहुंचाने के लिए आईएमसी को हर महीने करीब 25 करोड़ रुपये का बिजली बिल भरना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा संयंत्र के कारण आईएमसी के बिजली बिल में हर महीने करीब पांच करोड़ रुपये की कटौती होगी।
अधिकारियों के मुताबिक संयंत्र के संचालन से प्रतिवर्ष करीब 1.46 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका जा सकेगा और इसके संचालन के दौरान कोई प्रत्यक्ष उत्सर्जन नहीं होगा।
अधिकारियों के अनुसार सौर ऊर्जा संयंत्र से हर साल लगभग 9.60 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा उत्पादन की अनुमानित लागत करीब 3.50 रुपये प्रति यूनिट होगी, जबकि ग्रिड से मिलने वाली बिजली की दर छह रुपये से नौ रुपये प्रति यूनिट तक है।
भाषा
हर्ष रवि कांत