इंदौर पेयजल त्रासदी : न्यायिक जांच आयोग ने सार्वजनिक सूचना जारी करके मांगे सबूत और दस्तावेज

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इंदौर पेयजल त्रासदी : न्यायिक जांच आयोग ने सार्वजनिक सूचना जारी करके मांगे सबूत और दस्तावेज

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  • Publish Date - February 9, 2026 / 08:03 PM IST,
    Updated On - February 9, 2026 / 08:03 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), नौ फरवरी (भाषा) इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने सोमवार को सार्वजनिक सूचना जारी करके अपील की कि इस मामले से जुड़े सबूत, दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री कोई भी व्यक्ति 28 फरवरी तक उसके कार्यालय में पेश कर सकता है। अधिकारियों ने एक विज्ञप्ति में सोमवार को यह जानकारी दी।

विज्ञप्ति में बताया गया कि उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाले एक सदस्यीय आयोग को शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल दूषित होने के कारणों, दूषित पेयजल से हुई जन हानि एवं लोगों पर पड़े चिकित्सीय प्रभावों तथा प्रशासनिक लापरवाही की जांच करने और जिम्मेदार व्यक्तियों का पता लगाने और सुधारात्मक उपाय सुझाने का काम सौंपा गया है।

विज्ञप्ति के मुताबिक भागीरथपुरा और इसके आस-पास के इलाकों के प्रभावित नागरिकों एवं उनके परिजनों, जन प्रतिनिधियों, चिकित्सकों, अस्पतालों, सामाजिक संगठनों, ठेकेदारों, शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों या किसी भी व्यक्ति द्वारा इस मामले से संबंधित सबूत, दस्तावेज और अन्य जानकारी न्यायिक जांच आयोग के कार्यालय में 28 फरवरी तक प्रस्तुत की जा सकती है।

विज्ञप्ति में बताया गया कि भागीरथपुरा में पेयजल दूषित होने से संबंधित शिकायतें, मरीजों के चिकित्सीय दस्तावेज, मृत्यु प्रमाण पत्र, पेयजल पाइपलाइन में रिसाव और इसमें ‘सीवरेज’ मिलने से संबंधित फोटो एवं विडियो, जलापूर्ति से जुड़े कामों की निविदाओं के दस्तावेज, कार्य आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट भी आयोग के सामने पेश की जा सकती हैं।

अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था।

उन्होंने बताया कि शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के विशेषज्ञों की एक समिति भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त के कारण जान गंवाने सभी लोगों का ‘डेथ ऑडिट’ (मौत के कारण की जांच) कर रही है।

राज्य सरकार ने इस समिति की रिपोर्ट मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 27 जनवरी को पेश की थी।

रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत का संबंध इस इलाके में दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है।

अदालत ने दूषित पेयजल मामले की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई में एक सदस्यीय आयोग गठित किया था।

भाषा हर्ष

राजकुमार

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