Indore Bhikshuk Mukt Abhiyan: अब हाथ में भीख का कटोरा नहीं, किताब होगी! प्रशासन ने इस अभियान से बदली मासूमों की तकदीर, माता-पिता को भी मिलेगा रोजगार प्रशिक्षण

Indore Bhikshuk Mukt Abhiyan: अब हाथ में भीख का कटोरा नहीं, किताब होगी! प्रशासन ने इस अभियान से बदली मासूमों की तकदीर, माता-पिता को भी मिलेगा रोजगार प्रशिक्षण

Indore Bhikshuk Mukt Abhiyan: अब हाथ में भीख का कटोरा नहीं, किताब होगी! प्रशासन ने इस अभियान से बदली मासूमों की तकदीर, माता-पिता को भी मिलेगा रोजगार प्रशिक्षण

Indore Bhikshuk Mukt Abhiyan/Image Source: symbolic


Reported By: Ravi Sisodiya,
Modified Date: February 25, 2026 / 02:47 pm IST
Published Date: February 25, 2026 2:45 pm IST
HIGHLIGHTS
  • इंदौर प्रशासन का अनोखा अभियान
  • सड़कों से स्कूल तक पहुंचाए गए बच्चे
  • माता-पिता को भी मिलेगा रोजगार प्रशिक्षण

इंदौर: Indore Bhikshuk Mukt Abhiyan: इंदौर में चल रहे भिक्षुक मुक्त अभियान को अब नई दिशा दी गई है। प्रशासन ने भिक्षावृत्ति में लगे परिवारों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत 40 से अधिक बच्चों का स्कूलों में प्रवेश कराया गया है।

भिक्षुक मुक्त मिशन को नई दिशा! (Indore Beggar Free Campaign)

Indore Bhikshuk Mukt Abhiyan: प्रशासन द्वारा किए गए सर्वे में ऐसे परिवारों की पहचान की गई है, जो वर्षों से शहर के विभिन्न चौराहों और धार्मिक स्थलों के आसपास भिक्षावृत्ति कर रहे हैं। इन परिवारों के बच्चों की पढ़ाई छूटी हुई थी या वे कभी स्कूल गए ही नहीं थे। अब प्रशासन ने इन्हें औपचारिक शिक्षा से जोड़ने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च प्रशासन उठाएगा। उन्हें मुफ्त किताबें, कॉपियां, स्कूल ड्रेस, बैग और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर विशेष ब्रिज कोर्स और काउंसलिंग की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि बच्चे आसानी से स्कूल के वातावरण में ढल सकें।

बच्चों को मुफ्त किताबें, ड्रेस और शिक्षा (Indore Children Education Drive)

Indore Bhikshuk Mukt Abhiyan: इस अभियान की खास बात यह है कि यह केवल बच्चों के प्रवेश तक ही सीमित नहीं है। उनके माता-पिता को भी भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है। विभिन्न विभागों के समन्वय से उन्हें स्वरोजगार या श्रमिक कार्यों से जोड़ा जाएगा, ताकि परिवार को स्थायी आय का साधन मिल सके और वे दोबारा सड़कों पर न लौटें। प्रशासनिक टीम लगातार सर्वे कर रही है और परिवारों की काउंसलिंग भी की जा रही है। सामाजिक संस्थाओं का सहयोग भी लिया जा रहा है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण मिल सके। कलेक्टर का कहना है कि लक्ष्य केवल शहर को भिक्षुक मुक्त बनाना नहीं, बल्कि इन बच्चों को बेहतर भविष्य देना है। शिक्षा के माध्यम से ही स्थायी बदलाव संभव है और यही इस अभियान का मूल उद्देश्य है।

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लेखक के बारे में

टिकेश वर्मा- जमीनी पत्रकारिता का भरोसेमंद चेहरा... टिकेश वर्मा यानी अनुभवी और समर्पित पत्रकार.. जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव हैं। राजनीति, जनसरोकार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से सरकार से सवाल पूछता हूं। पेशेवर पत्रकारिता के अलावा फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना और किताबें पढ़ना मुझे बेहद पसंद है। सादा जीवन, उच्च विचार के मानकों पर खरा उतरते हुए अब आपकी बात प्राथिकता के साथ रखेंगे.. क्योंकि सवाल आपका है।