Madhya Pradesh High Court: ‘तुम्हारे जैसे एक हजार पति रख सकती हूं’.. पत्नी के ताने से भड़के पति ने कर दिया मर्डर… कोर्ट ने आरोपी को दी राहत, जानें क्या कहा

Madhya Pradesh High Court: पत्नी के ताने को सुनने के बाद एक पति ने उसकी हत्या कर दी थी। कोर्ट ने माना पति ने जो अपराध किया वो इरादतन नहीं।

Madhya Pradesh High Court: ‘तुम्हारे जैसे एक हजार पति रख सकती हूं’.. पत्नी के ताने से भड़के पति ने कर दिया मर्डर… कोर्ट ने आरोपी को दी राहत, जानें क्या कहा

Madhya Pradesh High Court/Photo Creadit: IBC24 File

Modified Date: July 4, 2026 / 11:36 pm IST
Published Date: July 4, 2026 11:33 pm IST
HIGHLIGHTS
  • छिंदवाड़ा के 2021 के मामले में पति को ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी
  • हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए इसे गैर-इरादतन हत्या माना और सजा 7 वर्ष कर दी
  • अदालत ने कहा कि निर्णय में घटना के साथ-साथ आरोपी की मानसिक स्थिति और परिस्थितियों का भी मूल्यांकन किया गया

जबलपुर। Madhya Pradesh High Court: ‘तुम्हारे जैसे एक हज़ार पति रख सकती हूं’.. अपनी पत्नी के इस ताने को सुनने के बाद एक पति ने उसकी हत्या कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी पति को उम्रकैद की सज़ा भी सुनाई लेकिन हाईकोर्ट ने सज़ा को घटाकर 7 साल की कैद में बदल दिया। कोर्ट ने माना कि पत्नी के ताने से आहत पति ने जो अपराध किया वो इरादतन नहीं, बल्कि गैर इरादतन हत्या है।

पत्थर से पत्नी के सिर पर कर दिया वार

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सितंबर 2021 को शिव कहार और उसकी पत्नी के बीच विवाद हुआ। बहस के दौरान पत्नी ने कहा कि मुझे तुम्हारे जैसे हजार पति मिल जाएंगे। ये बात सुनकर शिवा अपना आपा खो बैठा और पास में पड़े पत्थर से पत्नी के सिर पर वार कर दिया। अचानक हुए हमले में सात महीने की गर्भवती पत्नी किरण की मौत हो गई। घटना के बाद शिवा फरार नहीं हुआ। उसने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। साल 2021 की इस वारदात में छिंदवाड़ा की जिला अदालत ने ट्रायल के बाद साल 2024 में आरोपी पति को हत्या का दोषी माना और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को शिवा ने कोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने माना गैर-इरादतन हत्या

Madhya Pradesh High Court सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस हत्या को प्लान्ड मर्डर नहीं माना। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी का अपने पति को ये कहना कि वो उसके जैसे हजार पति रख सकती है, पति के सम्मान और उसके वजूद को नकारने वाली बात थी। अदालत ने माना कि इससे आरोपी को अचानक और गंभीर उकसावा मिला और उसी गुस्से में उसने पास पड़े पत्थर को पत्नी के सिर पर दे मारा जिससे उसकी मौत हो गई। कोर्ट ने ये भी माना कि आरोपी ने घटना के बाद न तो सबूत मिटाने की कोशिश की और न ही भागने का प्रयास किया, बल्कि खुद पुलिस और परिजनों को सूचना दी। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि ये मामला हत्या का नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या का है। अदालत ने उम्रकैद की सजा को घटाकर 7 साल की कैद में बदल दिया।

हाईकोर्ट  (Madhya Pradesh High Court) ने अपने इस फैसले से एक बार फिर साफ किया है कि अदालत सिर्फ घटना को नहीं, बल्कि घटना के पीछे की परिस्थितियों और आरोपी की मानसिक स्थिति को भी कानून के दायरे में परखती है। यही वजह है कि इस मामले में उम्रकैद की सजा घटाकर सात साल कर दी गई है।

 

ये भी पढ़ें


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.